Varuthini Ekadashi 2026: वरुथिनी एकादशी पर पड़ेगा पंचक का साया, जानें किन कामों से मिलेगा पुण्य

वरुथिनी एकादशी पर विधि-विधान से भगवान विष्णु का व्रत और पूजन किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत और श्रीहरि विष्णु के पूजन के प्रभाव से जाने अनजाने में किए सभी पापों का नाश हो जाता है. इस साल वरुथिनी एकादशी पर पंचक का साया भी पड़ रहा है. वारुथिनी एकादशी 13 अप्रैल को है. इसी दिन पंचक भी शुरू हो रहे हैं. पंचक काल को शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन कामों को करने से पुण्य प्राप्त होगा.

 

 सनातन धर्म में एकादशी का व्रत बहुत विशेष माना गया है. ये व्रत जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है. हर माह में दो एकादशी पड़ती है. पहली माह के कृष्ण और दूसरी शुक्ल पक्ष में. ये व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का सबसे शुभ अवसर होता है. वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी वरुथिनी एकादशी के नाम से जानी जाती है.

वरुथिनी एकादशी पर विधि-विधान से भगवान विष्णु का व्रत और पूजन किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत और श्रीहरि विष्णु के पूजन के प्रभाव से जाने अनजाने में किए सभी पापों का नाश हो जाता है. इस साल वरुथिनी एकादशी पर पंचक का साया भी पड़ रहा है. वारुथिनी एकादशी 13 अप्रैल को है. इसी दिन पंचक भी शुरू हो रहे हैं. पंचक काल को शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन कामों को करने से पुण्य प्राप्त होगा.

वरुथिनी एकादशी 2026 तिथि और व्रत पारण टाइम
पंचांग के अनुसार वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 व 13 अप्रैल की देर रात 01 बजकर 16 मिनट पर शुरू हो रही है. 13 व 14 अप्रैल को देर रात 01 बजकर 08 मिनट पर इस तिथि का समापन होगा. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा. इस एकादशी के व्रत का पारण 14 अप्रैल को सुबह 06 बजकर 54 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 31 मिनट तक किया जा सकेगा.

अप्रैल 2026 पंचक
वैदिक पंचांग के अनुसार, पंचक की शुरुआत 13 अप्रैल को तड़के सुबह 03 बजकर 44 मिनट पर हो रही है.
17 अप्रैल दोपहर 12 बजकर 02 मिनट पर इसका समापन होगा.
ये पंचक सोमवार से शुरू हो रहे हैं, तो इसे राज पंचक कहा जाएगा.

वारुथिनी एकदाशी पर इन कामों से मिलेगा पुण्य
पंचक काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं होता, लेकिन इस दौरान पूजा-पाठ और व्रत करना वर्जित नहीं होता. इसलिए पूरे विधि-विधान से वरुथिनी एकादशी का व्रत रखें और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें. इस एकादशी पर किया गया दान-पुण्य अक्षय फल देता है. लिहाजा वरुथिनी एकादशी के दिन अपनी सामर्थ्य अनुसार दान जरूर दें. इस दिन जल से भरे घड़े का दान करें. गरीबों और जरूरमंदों को भोजन कराएं. उन्हें सूती कपड़े दान करें. इन सभी कामों से कई गुना पुण्य फल मिलेगा.