सर्व पितृ अमावस्या का दिन श्राद्धपक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन, इन दो उपाय करें, पितृ प्रसन्न होकर जाएंगे अपने धाम…

पितृपक्ष के 16 दिन पूर्वजों की आत्म तृप्ति के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। लेकिन बहुत बार भागदौड़ भरी जिंदगी या जानकारी के अभाव में लोगों से श्राद्धपक्ष के दौरान तर्पण या श्राद्ध कर्म में कुछ जाने-अनजाने भूल-चूक हो जाती है या श्रद्धा नहीं कर पाते हैं। ऐसे में मन में यह आशंका बनी रहती है कि कहीं हमारे पूर्वज या पितृ देव हमसे नाराज तो नहीं हो गए? या फिर क्या हमारी दी हुई श्रद्धांजलि और पूजन से उन्हें पूरी तरह तृप्ति मिली भी है या नहीं? इस प्रकार की भ्रांतियां और संशय कई बार मनुष्य के मन को अशांत कर देते हैं।

 

पितृपक्ष के 16 दिन पूर्वजों की आत्म तृप्ति के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। लेकिन बहुत बार भागदौड़ भरी जिंदगी या जानकारी के अभाव में लोगों से श्राद्धपक्ष के दौरान तर्पण या श्राद्ध कर्म में कुछ जाने-अनजाने भूल-चूक हो जाती है या श्रद्धा नहीं कर पाते हैं। ऐसे में मन में यह आशंका बनी रहती है कि कहीं हमारे पूर्वज या पितृ देव हमसे नाराज तो नहीं हो गए? या फिर क्या हमारी दी हुई श्रद्धांजलि और पूजन से उन्हें पूरी तरह तृप्ति मिली भी है या नहीं? इस प्रकार की भ्रांतियां और संशय कई बार मनुष्य के मन को अशांत कर देते हैं।

हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक सर्व पितृ अमावस्या का दिन श्राद्धपक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है।अगर पूरे 16 दिनों में हमसे कोई गलती हुई हो या पितरों के लिए विशेष पूजन न कर पाए हों तो अमावस्या का यह पावन अवसर एक महान वरदान सिद्ध हो सकता है। इस दिन सच्चे मन से किए गए कुछ छोटे और सरल कार्य न सिर्फ पितरों के असंतोष को दूर करते हैं बल्कि उन्हें पूरी तरह से तृप्त कर उनके दिव्य आशीर्वाद का भागीदार भी बनाते हैं।


अमावस्या पर ये कार्य करना माना जाता है शुभ

1.सर्व पितृ अमावस्या के पावन दिन सुबह प्रातः काल उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि से पवित्र हों। इसके बाद एक पात्र में शुद्ध जल लें और उसमें काले तिल मिलाएं। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़े हों और पूर्ण श्रद्धा भाव के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें। दक्षिण दिशा पितरों का मार्ग मानी जाती है।अतः इस प्रकार तिल मिला जल अर्पित करने से यह सीधे पितृ देवताओं की आत्मा को तृप्ति और शांति प्रदान करता है।

2.अमावस्या के दिन अपने घर के मुख्य द्वार के ठीक बाहर सरसों के तेल का एक दीपक प्रज्वलित करें। उसके बाद दोनों हाथ जोड़कर सच्चे मन से अपने पूर्वजों का ध्यान करें और प्रार्थना करें: हे पितृ देवताओं! जाने-अनजाने में यदि हमसे कोई भूल-चूक हुई हो तो हमें क्षमा करें और अपना अखंड आशीर्वाद सदैव हमारे परिवार पर बनाए रखें। इस प्रकार श्रद्धापूर्वक विदा करने से प्रसन्न होकर पितृ देव घर-परिवार को सुख, समृद्धि और अखंड लक्ष्मी का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।