Shardiya Navratri 2026: अष्टमी-नवमी पर बिना सही मुहूर्त के न करें कंजक पूजन, जानें सही आयु और नियम

आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत इस बार 11 अक्टूबर से हो चुकी है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. इस पूरे उत्सव के दौरान कंजक पूजन का बहुत बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है. शास्त्रों के अनुसार दो वर्ष से लेकर दस वर्ष तक की कन्याओं को मां दुर्गा का साक्षात स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है, क्योंकि उम्र के हर पड़ाव का अपना विशेष धार्मिक महत्व होता है. इसके साथ ही नवरात्रि में कन्या पूजन के दौरान छोटे बालक को लांगुरिया (या लांगूर) कहा जाता है. उसे भैरव बाबा का स्वरूप माना जाता है, जिन्हें मां दुर्गा का रक्षक बताया गया है. इसलिए एक छोटे बालक कोभैरव बाबा या लांगुरा के रूप में बैठाकर पूजा जाता है. अष्टमी और नवमी तिथि के दिन सूर्योदय के बाद चौघड़िया के शुभ, लाभ या अमृत मुहूर्त में कंजक पूजन करना सबसे अधिक फलदायी माना गया है.

 

आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत इस बार 11 अक्टूबर से हो चुकी है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. इस पूरे उत्सव के दौरान कंजक पूजन का बहुत बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है. शास्त्रों के अनुसार दो वर्ष से लेकर दस वर्ष तक की कन्याओं को मां दुर्गा का साक्षात स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है, क्योंकि उम्र के हर पड़ाव का अपना विशेष धार्मिक महत्व होता है. इसके साथ ही नवरात्रि में कन्या पूजन के दौरान छोटे बालक को लांगुरिया (या लांगूर) कहा जाता है. उसे भैरव बाबा का स्वरूप माना जाता है, जिन्हें मां दुर्गा का रक्षक बताया गया है. इसलिए एक छोटे बालक कोभैरव बाबा या लांगुरा के रूप में बैठाकर पूजा जाता है. अष्टमी और नवमी तिथि के दिन सूर्योदय के बाद चौघड़िया के शुभ, लाभ या अमृत मुहूर्त में कंजक पूजन करना सबसे अधिक फलदायी माना गया है.

कंजक पूजन का महत्व और शुभ मुहूर्त में पूजा करने का फल
कंजक पूजन में 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को बैठाना विशेष माना गया है, क्योंकि हर उम्र की कन्या का अपना अलग धार्मिक महत्व होता है. 9 कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भैरव बाबा या लांगुरा के रूप में पूजना अत्यंत आवश्यक होता है. कंजक पूजन के लिए अष्टमी या नवमी तिथि पर सुबह सूर्योदय के बाद का समय सबसे सही रहता है. चौघड़िया के अनुसार शुभ, लाभ या अमृत मुहूर्त में किया गया पूजन घर में खुशहाली और सुख-समृद्धि लेकर आता है. सुबह 06:30 से 10:30 के बीच का समय पूजन के लिए सबसे उत्तम माना गया है. यदि आप राहुकाल का त्याग करके सही समय पर कंजकों को भोजन कराते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं, तो माता रानी बहुत प्रसन्न होती हैं. इससे परिवार पर देवी मां की कृपा बनी रहती है.

कन्या पूजन की सही विधि और सत्कार के नियम


आदरपूर्वक आमंत्रण: कन्या पूजन की शुरुआत में सबसे पहले कन्याओं को बहुत सम्मान के साथ अपने घर पर आमंत्रित करें.
चरण प्रक्षालन व आसन: स्वच्छ जल या दूध से कन्याओं के पैर धोएं और उन्हें आदर के साथ आसन पर बिठाएं.
तिलक व मौली बांधना: माथे पर कुमकुम, रोली और अक्षत का तिलक लगाएं और हाथों में सुरक्षा के रूप में मौली बांधें.
सात्विक भोग परोसना: मां दुर्गा के पावन प्रसाद के रूप में पूरी, हलवा और काले चने बहुत प्रेमपूर्वक परोसें.
चुनरी व दक्षिणा भेंट करना: भोजन के बाद उन्हें लाल चुनरी उड़ाएं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार फल, श्रृंगार सामग्री व दक्षिणा भेंट करें.
चरण स्पर्श व आशीर्वाद: अंत में भक्ति भाव से उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें; इससे पूजा पूरी तरह सफल होती है.
राहुकाल का त्याग: ध्यान रखें कि राहुकाल के समय पूजन करने से बचें, ताकि व्रत का पूरा शुभ फल मिल सके.


किस आयु की कन्या के पूजन से मिलती है कौन सी सिद्धि
दो वर्ष की कन्या (कुमारी):
दो वर्ष की कन्या का पूजन करने से घर में सुख, शांति और धन-धान्य की वृद्धि होती है.
तीन वर्ष की कन्या (त्रिमूर्ति): तीन वर्ष की त्रिमूर्ति स्वरूपा कन्या को पूजने से परिवार में सुख-समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है.
चार वर्ष की कन्या (कल्याणी): चार वर्ष की कल्याणी कन्या का पूजन करने से सभी प्रकार के कार्यों में सफलता और पारिवारिक सुख मिलता है.
पांच वर्ष की कन्या (रोहिणी): पांच वर्ष की रोहिणी कन्या को भोजन कराने से व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ्य और आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
छः वर्ष की कन्या (कालिका): छह वर्ष की कालिका स्वरूपा कन्या का पूजन करने से विद्या, बुद्धि और विशेष यश की प्राप्ति होती है.
सात वर्ष की कन्या (चंडिका): सात वर्ष की चंडिका कन्या का पूजन करने से जीवन में ऐश्वर्य और अपार धन की प्राप्ति होती है.
आठ वर्ष की कन्या (शाम्भवी): आठ वर्ष की शाम्भवी कन्या को पूजने से समाज में मान-सम्मान और वाद-विवाद में विजय मिलती है.
नौ वर्ष की कन्या (दुर्गा): नौ वर्ष की दुर्गा स्वरूपा कन्या का पूजन करने से शत्रुओं पर विजय और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
दस वर्ष की कन्या (सुभद्रा): दस वर्ष की सुभद्रा कन्या का पूजन करने से माता रानी भक्त के सभी संकट दूर करके उसकी हर इच्छा पूरी करती हैं.