Sharad Purnima Time: शरद पूर्णिमा पर कब रखें खीर? नोट करें चांदनी में रखने का सही समय और जरूरी नियम
सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा का पर्व बहुत बड़ा और विशेष स्थान रखता है, जिसे कोजागरी पूर्णिमा के रूप में भी बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. इस वर्ष शरद पूर्णिमा यानी कोजागरी पूर्णिमा रविवार, 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी. इस पावन पर्व से जुड़ी तिथि, सही समय और खीर रखने की जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है.
सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा का पर्व बहुत बड़ा और विशेष स्थान रखता है, जिसे कोजागरी पूर्णिमा के रूप में भी बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. इस वर्ष शरद पूर्णिमा यानी कोजागरी पूर्णिमा रविवार, 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी. इस पावन पर्व से जुड़ी तिथि, सही समय और खीर रखने की जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है.
जीवन में सुख-शांति और मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए इस रात को बहुत खास माना गया है. व्रत रखने वाले सभी भक्तों को सही समय पर खीर रखनी चाहिए. इस विशेष रात का धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बहुत अधिक महत्व माना गया है. आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि इस पावन पर्व पर चंद्रमा की रोशनी में खीर किस समय रखें.
खीर को खुली चांदनी में रखने का सही समय
चंद्रोदय शाम 4:55 बजे के बाद से लेकर मध्यरात्रि निशीथ काल यानी रात 12:30 बजे तक खीर को खुली चांदनी में रखना सबसे उत्तम माना जाता है. यह समय भक्तों के लिए बहुत खास होता है क्योंकि इस दौरान चंद्रमा अपनी पूरी कलाओं के साथ चमकता है और आसमान से अमृत की वर्षा होती है. सही समय पर खीर को खुले आसमान के नीचे रखने से उसमें चंद्रमा की किरणें सीधी पड़ती हैं, जिससे वह साधारण खीर नहीं बल्कि अमृत समान प्रसाद बन जाती है. जो लोग इस निश्चित समय के भीतर खीर रखते हैं, उन्हें इस पावन व्रत का पूरा और अद्भुत फल प्राप्त होता है. इस प्रकार सही समय का ध्यान रखकर कार्य करने से घर-परिवार में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और सभी सदस्यों को आरोग्यता की प्राप्ति होती है.
खीर को सुरक्षित रखने के नियम
खीर को किसी खुले बर्तन में बनाकर महीन सूती कपड़े यानी मलमल से ढककर रखना चाहिए ताकि उसमें किसी प्रकार के कीट या धूल न गिरे. साफ-सफाई का यह नियम बहुत जरूरी है क्योंकि भगवान को अर्पित किया जाने वाला भोग पूरी तरह शुद्ध और पवित्र होना चाहिए. मलमल के कपड़े से ढकने के बाद भी चंद्रमा की अमृतमयी किरणें आसानी से खीर के अंदर पहुंच जाती हैं, जिससे उसकी पवित्रता में कोई कमी नहीं आती है. इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से पूजा की पूर्णता बनी रहती है और किसी भी तरह की कोई असुविधा नहीं होती है. जो भक्त इन नियमों का पालन करते हैं, उनके घर में माता लक्ष्मी की असीम कृपा हमेशा बनी रहती है और कभी भी किसी चीज की कोई कमी नहीं होती है.
खीर का भोग और प्रसाद ग्रहण करने की विधि
इसके बाद मध्यरात्रि या अगली सुबह इसे माता लक्ष्मी और भगवान को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है. यह प्रक्रिया इस पावन पर्व की सबसे महत्वपूर्ण विधि मानी जाती है, जिसे पूरी श्रद्धा के साथ पूरा किया जाना चाहिए. भगवान को भोग लगाने के बाद इस पवित्र खीर को परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांटना चाहिए और खुद भी ग्रहण करना चाहिए. इस प्रसाद को खाने से शरीर के सारे रोग और कष्ट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं और मन को असीम शांति मिलती है. जो लोग इन सभी परंपराओं का सही तरीके से पालन करते हैं, उनका पूरा जीवन धन्य हो जाता है. इस प्रकार शरद पूर्णिमा की रात का यह उपाय इंसान के जीवन में हमेशा सुख और समृद्धि बनाए रखता है.