पद्मिनी एकादशी का आज रखा जा रहा व्रत, पूजा विधि और पारण का सही समय जरूर करें नोट

सनातन धर्म में एकादशी व्रत सबसे पवित्र व्रतों में से एक माना जाता है. आज देशभर में पद्मिनी एकादशी मनाई जा रही है. ये एकादशी अधिक माह (मलमास या पुरुषोत्तम मास) के शुक्ल पक्ष में आती है. पद्मिनी एकादशी का व्रत करने के लिए कोई चन्द्र मास तय नहीं होता है. इसके व्रत को लेकर काफी कंफ्यूजन रहा है क्योंकि एकादशी 26 मई को शुरू हुई है. हालांकि 27 मई को सूर्य उदय होने के बाद पद्मिनी एकादशी का समापन हो रहा है. इस वजह से इसे उदिया तिथि में मनाया जा रहा है. सबसे बड़ी बात ये है कि व्रत का पारण आज नहीं कल यानी 28 मई को किया जाएगा.

 

सनातन धर्म में एकादशी व्रत सबसे पवित्र व्रतों में से एक माना जाता है. आज देशभर में पद्मिनी एकादशी मनाई जा रही है. ये एकादशी अधिक माह (मलमास या पुरुषोत्तम मास) के शुक्ल पक्ष में आती है. पद्मिनी एकादशी का व्रत करने के लिए कोई चन्द्र मास तय नहीं होता है. इसके व्रत को लेकर काफी कंफ्यूजन रहा है क्योंकि एकादशी 26 मई को शुरू हुई है. हालांकि 27 मई को सूर्य उदय होने के बाद पद्मिनी एकादशी का समापन हो रहा है. इस वजह से इसे उदिया तिथि में मनाया जा रहा है. सबसे बड़ी बात ये है कि व्रत का पारण आज नहीं कल यानी 28 मई को किया जाएगा.

दरअसल, एकादशी तिथि महीने में दो बार आती है. इस दौरान श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं और व्रत धारण करते हैं. विशेष रूप से, यह दिन मन की शांति, शारीरिक स्वच्छता और आध्यात्मिक विकास में सहायक माना जाता है. अनेक लोग इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु का आशीर्वाद करते हैं. ऐसा माना जाता है कि एकादशी के दिन व्रत रखने से शरीर और मन की शुद्धि होती है. यह व्रत पापों की क्षमा, मन की पवित्रता और परिवार के कल्याण के लिए रखा जाता है.

पद्मिनी एकादशी कितने बजे से हुई शुरू 
पद्मिनी एकादशी तिथि 26 मई की सुबह 05 बजकर 10 मिनट से शुरू हुई.
पद्मिनी एकादशी तिथि 27 मई की सुबह 06 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगी.

पद्मिनी एकादशी व्रत का पारण
इस एकादशी के व्रत का पारण 27 मई को नहीं किया जाएगा. द्रिक पंचांग के मुताबिक, 28 तारीख को द्वादशी सुबह 7 बजकर 56 मिनट पर समाप्त हो रही है. इससे पहले श्रद्धालु व्रत का पारण कर सकते हैं. हालांकि एक बात विशेषतौर पर ध्यान रखने की जरूरत है कि व्रत का पारण सूर्य उदय होने के बाद ही करें. 28 मई को सूर्य उदय 5 बजकर 25 मिनट पर होगा. दरअसल, द्वादशी तिथि के भीतर एकादशी के व्रत का पारण न करना पाप करने के समान माना गया है.

पद्मिनी एकादशी पूजा विधि 
सुबह जल्दी उठें और गंगा जल या शुद्ध जल से स्नान करें.
पवित्र होने के बाद एक चौकी लें और उसे शुद्ध जल से धुलें.
घर के मंदिर में उस चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें.
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं.
स्नान करवाने के बाद फूलों, तुलसी की माला और पीले वस्त्रों से सजाएं.
देसी घी का दीपक जलाएं, अगरबत्ती लगाएं.
पूजा में मिष्ठान, फल, तुलसी के दल और पंचामृत का भोग लगाएं.
पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें. इसके अलावा विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.