Lohri 2025: लोहड़ी की अग्नि में जरूर डालें ये 3 चीजें, सुख-समृद्धि के साथ हो सकता है भाग्योदय
लोहड़ी का त्योहार विशेषकर पंजाब और हरियाणा में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार का नाम 'तिलोहड़ी' शब्द से लिया गया है, जो 'तिल' और 'रोरही' गुड़ शब्दों के मेल से बना है। इस त्योहार के पीछे कई पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं जुड़ी हुई हैं, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना और नई फसल का स्वागत करना है। लोहड़ी मुख्य रूप से किसान समुदाय द्वारा मनाया जाता है। यह त्योहार रबी की फसल के कटने के बाद मनाया जाता है, इसलिए इसे फसल का त्योहार भी कहा जाता है। किसान अपनी कटी हुई फसल को अग्नि देवता को अर्पित करते हैं और एक समृद्ध वर्ष की कामना करते हैं। आपको बता दें, लोहड़ी को नए साल की शुरुआत के रूप में भी देखा जाता है। यह त्योहार सर्दियों के मौसम के अंत और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। इस दिन लोग आग के चारों ओर नृत्य करते हैं और गीत गाते हैं। लोहड़ी की रात को साल की सबसे लंबी रात माना जाता है, जिसे शीतकालीन संक्रांति भी कहते हैं।इस दिन के बाद से दिन लंबे होने लगते हैं और सर्दी का प्रकोप कम होने लगता है। अब ऐसे में लोहड़ी की अग्नि में क्या डालना शुभ माना जाता है। इसके बारे में जानते हैं।
लोहड़ी का त्योहार विशेषकर पंजाब और हरियाणा में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार का नाम 'तिलोहड़ी' शब्द से लिया गया है, जो 'तिल' और 'रोरही' गुड़ शब्दों के मेल से बना है। इस त्योहार के पीछे कई पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं जुड़ी हुई हैं, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना और नई फसल का स्वागत करना है। लोहड़ी मुख्य रूप से किसान समुदाय द्वारा मनाया जाता है। यह त्योहार रबी की फसल के कटने के बाद मनाया जाता है, इसलिए इसे फसल का त्योहार भी कहा जाता है। किसान अपनी कटी हुई फसल को अग्नि देवता को अर्पित करते हैं और एक समृद्ध वर्ष की कामना करते हैं। आपको बता दें, लोहड़ी को नए साल की शुरुआत के रूप में भी देखा जाता है। यह त्योहार सर्दियों के मौसम के अंत और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। इस दिन लोग आग के चारों ओर नृत्य करते हैं और गीत गाते हैं। लोहड़ी की रात को साल की सबसे लंबी रात माना जाता है, जिसे शीतकालीन संक्रांति भी कहते हैं।इस दिन के बाद से दिन लंबे होने लगते हैं और सर्दी का प्रकोप कम होने लगता है। अब ऐसे में लोहड़ी की अग्नि में क्या डालना शुभ माना जाता है। इसके बारे में जानते हैं।
लोहड़ी की अग्नि में डालें मूंगफली
मूंगफली को अन्न का प्रतीक माना जाता है। लोहड़ी की अग्नि में मूंगफली डालकर किसान अपनी फसल की रक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं और आने वाले समय में अच्छी फसल की कामना करते हैं। मूंगफली को सूर्य देव को अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि सूर्य देव की कृपा से फसल अच्छी होती है। मूंगफली को समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। लोहड़ी की अग्नि में मूंगफली डालकर लोग अपने घर में सुख-समृद्धि लाने की कामना करते हैं। मान्यताओं के अनुसार, मूंगफली को देवी लक्ष्मी का प्रिय फल माना जाता है। इसलिए लोहड़ी की अग्नि में मूंगफली डालकर लोग देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करते हैं।
लोहड़ी की अग्नि में डालें रेवड़ी
हिंदू धर्म में अग्निदेव को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। लोहड़ी की अग्नि में रेवड़ी डालकर लोग अग्निदेव को प्रसन्न करते हैं और उनसे सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मान्यता है कि लोहड़ी की अग्नि में रेवड़ी डालने से बुरी शक्तियां नष्ट होती हैं और घर में सुख-शांति आती है। कई लोगों का मानना है कि लोहड़ी की अग्नि में रेवड़ी डालने से बच्चों पर कोई संकट नहीं आता और वे स्वस्थ रहते हैं।
लोहड़ी की अग्नि में डालें काले तिल
ज्योतिष शास्त्र में काले तिल को नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि नजरदोष से छुटकारा पाने के लिए लोहड़ी के दिन काले तिल लोहड़ी की आग्नि में डालकर अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं।