Kartik Maas 2026: कार्तिक का पावन महीना आज से शुरू, तुलसी पूजा और स्नान से मिटेंगे सारे पाप… जानें जरूरी नियम

हिंदू धर्म में कार्तिक मास को बेहद पवित्र और पुण्यदायी महीना माना जाता है. यह महीना भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना, तुलसी पूजा, स्नान, दान और दीपदान के लिए विशेष महत्व रखता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा-पाठ करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में कार्तिक मास की शुरुआत 27 अक्टूबर से हो रही है और इसका समापन 24 नवंबर को होगा. इस दौरान दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्व आते हैं. आइए जानते हैं कि इस महीने का क्या महत्व है और किन नियमों का पालन किया जाता है.

 

हिंदू धर्म में कार्तिक मास को बेहद पवित्र और पुण्यदायी महीना माना जाता है. यह महीना भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना, तुलसी पूजा, स्नान, दान और दीपदान के लिए विशेष महत्व रखता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा-पाठ करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में कार्तिक मास की शुरुआत 27 अक्टूबर से हो रही है और इसका समापन 24 नवंबर को होगा. इस दौरान दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्व आते हैं. आइए जानते हैं कि इस महीने का क्या महत्व है और किन नियमों का पालन किया जाता है.

कार्तिक मास 27 अक्टूबर से ही क्यों शुरू हुआ?
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 26 अक्टूबर 2026 को सुबह 9:42 बजे शुरू हुई थी और यह 27 अक्टूबर को सुबह 7:02 बजे तक रहेगी. ऐसे में सवाल उठता है कि जब प्रतिपदा तिथि 26 अक्टूबर को ही लग गई थी, तो कार्तिक मास की शुरुआत 27 अक्टूबर से क्यों मानी जा रही है? दरअसल, पंचांग में व्रतों, त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों के निर्धारण में उदया तिथि को महत्व दिया जाता है. उदया तिथि का मतलब वह तिथि जो स्थानीय सूर्योदय के समय मौजूद हो. 26 अक्टूबर को सूर्योदय के समय आश्विन पूर्णिमा तिथि थी, जबकि कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा का सूर्योदय 27 अक्टूबर को हुआ. इसी आधार पर इस साल कार्तिक मास की शुरुआत 26 से नहीं 27 अक्टूबर से मानी जा रही है.

कार्तिक मास में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान क्यों है खास?
कार्तिक मास में सुबह जल्दी उठकर स्नान करने की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके भगवान विष्णु का स्मरण करना शुभ माना जाता है. कई श्रद्धालु इस पूरे महीने में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करते हैं और इसके बाद पूजा-पाठ करते हैं. स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर अपने इष्टदेव की पूजा की जाती है. कुछ लोग घर में गंगाजल का उपयोग करते हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार सामान्य जल से ही स्नान करते हैं.

कार्तिक मास में तुलसी पूजा का क्या महत्व है?
कार्तिक मास में तुलसी पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है. हिंदू धर्म में तुलसी को पूजनीय माना जाता है और इसे भगवान विष्णु की प्रिय माना गया है. इसी कारण इस महीने में कई श्रद्धालु प्रतिदिन तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं. मान्यता है कि तुलसी की पूजा करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है.

कार्तिक मास में दीपदान क्यों किया जाता है?
कार्तिक मास में दीपदान की परंपरा का विशेष महत्व बताया जाता है. इस महीने में घर के मंदिर, तुलसी के पौधे और कुछ धार्मिक स्थलों पर दीपक जलाए जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं में दीपक को प्रकाश, शुभता और अंधकार पर विजय का प्रतीक माना गया है. कार्तिक मास के दौरान शाम के समय दीपक जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्मरण करने की परंपरा है. काफी श्रद्धालु मंदिरों, नदियों और पवित्र सरोवरों के पास भी दीपदान करते हैं

कार्तिक मास में दान का क्या है महत्व?
हिंदू धर्म में कार्तिक मास को दान-पुण्य के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करने की परंपरा है. इस महीने में अन्नदान, वस्त्रदान और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्य भी किए जाते हैं.

कार्तिक मास 2026 में कौन-कौन से प्रमुख त्योहार आएंगे?
कार्तिक मास में कई प्रमुख हिंदू त्योहार मनाए जाते हैं. इस दौरान धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और कार्तिक पूर्णिमा जैसे पर्व आते हैं.