Jitiya Vrat Parana 2026: जितिया व्रत का पारण आज, जानें सही समय और विधि, भूलकर भी न करें ये गलतियां!

 जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाता है. इस व्रत में माताएं अपनी संतान के लिए निर्जला उपवास रखती हैं और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं. इस साल 3 अक्टूबर को जितिया व्रत रखा गया था. धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से जितिया व्रत रखने से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और उसकी लंबी उम्र की कामना पूरी होती है.

 

 जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाता है. इस व्रत में माताएं अपनी संतान के लिए निर्जला उपवास रखती हैं और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं. इस साल 3 अक्टूबर को जितिया व्रत रखा गया था. धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से जितिया व्रत रखने से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और उसकी लंबी उम्र की कामना पूरी होती है.

अगर आपने भी जितिया का निर्जला व्रत रखा है तो इसका पारण भी सही समय और विधि से करना जरूरी माना जाता है. मान्यता है कि व्रत के नियमों का पालन करने के बाद ही उसका पूर्ण फल प्राप्त होता है. इसलिए पारण से पहले स्नान, पूजा और दान-पुण्य जैसी परंपराओं को पूरा करना चाहिए और इसके बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत खोलना चाहिए.

जितिया व्रत पारण कब है?
जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026 को सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद सूर्योदय के पश्चात किया जाएगा. पारण से पहले सुबह स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य दें और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें. इसके बाद किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को भोजन, अन्न, वस्त्र और अपनी क्षमता के अनुसार दान-दक्षिणा देकर व्रत खोलना शुभ माना जाता है.

जितिया व्रत का पारण कैसे करें?
नवमी तिथि की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें.
इसके बाद सूर्य देव और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें.
पूजा पूरी होने के बाद अपनी संतान से ढके हुए फल या प्रसाद के ऊपर रखा कपड़ा या पर्दा हटवाने की भी परंपरा है.
पारण से पहले किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें.
इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत का पारण करें.
जितिया व्रत के पारण में मडुआ यानी रागी की रोटी, नोनी का साग और झिंगनी यानी तोरी की सब्जी खाई जाती है.
इसके बाद अन्य सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत खोला जा सकता है.
जितिया व्रत पारण में न करें ये गलतियां
व्रत का पारण सूर्योदय से पहले या अष्टमी तिथि समाप्त होने से पहले नहीं करना चाहिए. नवमी तिथि लगने के बाद सही समय पर ही विधि-विधान से व्रत खोलें.

पारण के समय तामसिक भोजन से बचना चाहिए और केवल सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए. साथ ही इस दिन काले रंग के कपड़े पहनने से भी बचने की मान्यता है.

इसके अलावा पारण के समय किसी से वाद-विवाद न करें और न ही किसी के बारे में गलत विचार रखें. व्रत खोलते समय मन को शांत और सकारात्मक रखना शुभ माना जाता है.