Holika Dahan Puja Vidhi 2026: होलिका दहन पर इस विधि से करें पूजा, घर में आएगी सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा

होली हिंदू धर्म का एक प्रमुख और अत्यंत पवित्र पर्व है और इस पर्व में होलिका दहन का अलग महत्व होता है। होलिका दहन फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था। यही नहीं इस पर्व को मनाने की एक खास वजह यह भी है कि इसी दिन होलिका ने प्रह्लाद को अपनी गोद में बैठाकर अग्नि में जलाने की कोशिश की थी, होलिका को वरदान था कि उसे अग्नि जला नहीं सकती है। हालांकि, प्रह्लाद की भक्ति को देखकर विष्णु जी ने उन्हें सुरक्षित रखा कर होलिका का अग्नि में दहन हो गया। उसी समय से होलिका दहन का पर्व मनाया जाने लगा और आज भी मान्यता यह है कि होलिका की अग्नि में सभी बुराइयां जल जाती हैं और अच्छाई की विजय होती है। ऐसा कहा जाता है कि होलिका दहन के दिन यदि आप सही पूजा विधि से पूजन करती हैं तो सदैव घर में खुशहाली बनी रहती है और जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें आपको होलिका दहन की पूजा किस विधि से करनी चाहिए।

 

होली हिंदू धर्म का एक प्रमुख और अत्यंत पवित्र पर्व है और इस पर्व में होलिका दहन का अलग महत्व होता है। होलिका दहन फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था। यही नहीं इस पर्व को मनाने की एक खास वजह यह भी है कि इसी दिन होलिका ने प्रह्लाद को अपनी गोद में बैठाकर अग्नि में जलाने की कोशिश की थी, होलिका को वरदान था कि उसे अग्नि जला नहीं सकती है। हालांकि, प्रह्लाद की भक्ति को देखकर विष्णु जी ने उन्हें सुरक्षित रखा कर होलिका का अग्नि में दहन हो गया। उसी समय से होलिका दहन का पर्व मनाया जाने लगा और आज भी मान्यता यह है कि होलिका की अग्नि में सभी बुराइयां जल जाती हैं और अच्छाई की विजय होती है। ऐसा कहा जाता है कि होलिका दहन के दिन यदि आप सही पूजा विधि से पूजन करती हैं तो सदैव घर में खुशहाली बनी रहती है और जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें आपको होलिका दहन की पूजा किस विधि से करनी चाहिए।

होलिका दहन पूजा विधि 

होलिका दहन की पूजा करते समय आपको दिशा का ध्यान जरूर रखना चाहिए। पूजन के समय आप पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
होलिका की पूजा करते समय एक लोटा जल, माला, रोली, चावल गंध पुष्प कच्चा,सूत गुड़ साबुत हल्दी मूंग, बताशे गुलाल, गुजिया आदि रखनी चाहिए।
इसके अलावा कुछ पकी हुई फसलें जैसे चने या गेहूं की बालियां भी सामग्री के रूप में रखी जाती हैं।
होलिका दहन करते समय गाय के गोबर से बने उपलों की माला लाएं और होलिका पूजन के स्थान पर रखें।
गोबर के उपलों की एक माला पितरों के नाम की, एक हनुमान जी के नाम की, एक शीतला माता के नाम की और एक अपने घर परिवार के नाम की रखी जाती है।
कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर तीन या सात बार लपेटें और फिर लोटे में से शुद्ध जल लेकर होलिका के चारों ओर जल डालें।
अन्य वस्तुएं भी एक-एक करके होलिका के पास समर्पित करें और रोली चावल और पुष्प सभी चीजों को भी इस पूजा में इस्तेमाल करें।
इसके बाद विधि पूर्वक होलिका का पूजन करें और होलिका की परिक्रमा 7 बार करें।
होलिका दहन की पूजा करते हुए नरसिंह भगवान का ध्यान करें उन्हें रोली चंदन पांच प्रकार के अनाज और फूल भी अर्पित करें।
होलिका की पूजा के साथ नरसिंह भगवान की पूजा करें और घर की समृद्धि की कामना करें।
होलिका दहन के समय भी आपको जलती हुई होलिका के पास 7 बार परिक्रमा करनी चाहिए और होलिका की अग्नि में नारियल और कपूर चढ़ाना चाहिए।
होलिका दहन के दिन आपको घर के सभी लोगों को उबटन लगाकर उस उबटन को होलिका को अर्पित कर देना चाहिए। इससे घर की सभी नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं।

होलिका दहन का धार्मिक परंपराएं

होलिका दहन पर मुख्य रूप से अग्नि जलाना, लकड़ी, सूखे पत्तों और गोबर के उपलों का उपयोग करके अग्नि जलाने को प्रमुख माना जाता है। भक्तों का होलिका की अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करना भी मुख्य परंपरा माना जाता है और नारियल, गेहूं की बालियां, चना और फूल जैसी वस्तुएं अग्नि में चढ़ाना प्रमुख माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि अग्नि आध्यात्मिक और शारीरिक अशुद्धियों को जलाकर शांति और समृद्धि लाने का प्रतीक मानी जाती है। होलिका दहन आत्मा की शुद्धि, नकारात्मक शक्तियों के नाश और सकारात्मक ऊर्जा के संचार का प्रतीक होती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और विश्वास के आगे हर बुराई का अंत निश्चित है। होलिका की अग्नि में अपनी बुरी आदतों, ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों का त्याग करने का संकल्प लिया जाता है।

होलिका दहन का महत्व क्या है?

ऐसी मान्यता है कि होलिका की अग्नि में सभी बुराइयों का दहन किया जाता है और यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होता है। यह पर्व भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और सत्य की शक्ति के सामने होलिका का अहंकार और अत्याचार जलकर भस्म हो गया था। इसी घटना को याद करते हुए हर वर्ष होलिका दहन किया जाता है। इस दिन होलिका की पवित्र अग्नि में नकारात्मक ऊर्जा, बुरी आदतें, ईर्ष्या और मन के विकारों का दहन होता है। श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।