Ganga Saptami Puja: आज मनाई जा रही है गंगा सप्तमी, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री
गंगा सप्तमी का आज पावन पर्व मनाया जा रहा है. इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर ‘हर हर गंगे’ का स्मरण करते हुए स्नान करें. इसके बाद घर के मंदिर में एक छोटी चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर मां गंगा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें. यदि प्रतिमा न हो, तो एक कलश में जल भरकर उसे ही मां गंगा का स्वरूप मानकर पूजन करें. मां गंगा को पुष्प, अक्षत, चंदन और धूप-दीप अर्पित करें.
गंगा सप्तमी का आज पावन पर्व मनाया जा रहा है. इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर ‘हर हर गंगे’ का स्मरण करते हुए स्नान करें. इसके बाद घर के मंदिर में एक छोटी चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर मां गंगा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें. यदि प्रतिमा न हो, तो एक कलश में जल भरकर उसे ही मां गंगा का स्वरूप मानकर पूजन करें. मां गंगा को पुष्प, अक्षत, चंदन और धूप-दीप अर्पित करें.
इस दिन सफेद रंग की मिठाई या खीर का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है. पूजा के अंत में गंगा मैया की आरती करें और सुख-शांति की प्रार्थना करें. गंगा सप्तमी पर पूजा करने का मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:01 से दोपहर 01:38 तक है. कुल अवधि 02 घंटे 37 मिनट तक की है.
दरअसल, सप्तमी तिथि का आरंभ 22 अप्रैल को रात 10:49 बजे से हो हुआ है. सप्तमी तिथि का समापन 23 अप्रैल रात 08:49 बजे तक होगा.
गंगा सप्तमी: घर पर पूजन की विधि
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सुबह जल्दी उठें और नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर ‘हर हर गंगे’ का जाप करते हुए स्नान करें.
स्थापना: मंदिर में एक छोटी चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर मां गंगा की तस्वीर या प्रतिमा रखें; प्रतिमा न होने पर जल से भरे कलश को ही उनका स्वरूप मानकर स्थापित करें.
तिलक और पुष्प: मां गंगा को आदर के साथ चंदन का तिलक लगाएं और ताजे पुष्प अर्पित करें.
धूप-दीप: दीपक और धूप जलाकर वातावरण को शुद्ध और भक्तिमय बनाएं. भोग: उन्हें सफेद मिठाई या घर में बनी मिश्री वाली खीर का भोग लगाएं, जो अत्यंत शुभ माना जाता है.
आरती और प्रार्थना: अंत में पूरी श्रद्धा से मां गंगा की आरती करें और परिवार की सुख-शांति व खुशहाली के लिए प्रार्थना करें.
पुण्य प्राप्ति के लिए विशेष सेवा और दान
गंगा सप्तमी पर पूजा संपन्न करने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान का संकल्प लेना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है. इस पावन तिथि पर विशेष रूप से ‘जल दान’ का बहुत बड़ा महत्व है. किसी प्यासे व्यक्ति या पशु-पक्षी के लिए शीतल जल की व्यवस्था करना मां गंगा की सबसे सच्ची सेवा और पूजा है. इसके अतिरिक्त, किसी जरूरतमंद को सफेद अन्न, जैसे चावल या शक्कर दान करना अक्षय पुण्य प्रदान करता है. यह सेवा भाव हमें गहराई से सिखाता है कि धर्म केवल बाहरी अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरों के प्रति प्रेम, करुणा और दया दिखाना ही वास्तविक आध्यात्मिक उन्नति है. यह पवित्र दिन हमें अपने आचरण और विचारों को मां गंगा की धारा की तरह निर्मल और पावन बनाने की प्रेरणा देता है.