8 या 9 अगस्त… कब है कामिका एकादशी? जानें इस बार बने दुर्लभ संयोग के नियम और सावधानियां
इस साल कामिका एकादशी का पावन पर्व 9 अगस्त यानी रविवार को मनाया जाएगा. सावन माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली यह तिथि धार्मिक दृष्टि से बहुत मंगलकारी मानी जाती है. पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 8 अगस्त को दोपहर 1:59 बजे से शुरू होकर 9 अगस्त को सुबह 11:04 बजे तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार व्रत 9 अगस्त को ही रखा जाएगा. इस दिन सुबह स्नान के बाद श्री हरि की विधिवत पूजा का विधान है. सावन का महीना होने से इस तिथि पर भगवान विष्णु के साथ भोलेनाथ की आराधना का भी दुर्लभ संयोग बनता है. निष्ठापूर्वक पूजन करने से जीवन की सभी उलझनें समाप्त हो जाती हैं और घर में सुख का आगमन होता है.
इस साल कामिका एकादशी का पावन पर्व 9 अगस्त यानी रविवार को मनाया जाएगा. सावन माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली यह तिथि धार्मिक दृष्टि से बहुत मंगलकारी मानी जाती है. पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 8 अगस्त को दोपहर 1:59 बजे से शुरू होकर 9 अगस्त को सुबह 11:04 बजे तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार व्रत 9 अगस्त को ही रखा जाएगा. इस दिन सुबह स्नान के बाद श्री हरि की विधिवत पूजा का विधान है. सावन का महीना होने से इस तिथि पर भगवान विष्णु के साथ भोलेनाथ की आराधना का भी दुर्लभ संयोग बनता है. निष्ठापूर्वक पूजन करने से जीवन की सभी उलझनें समाप्त हो जाती हैं और घर में सुख का आगमन होता है.
कामिका एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कामिका एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी जाने-अनजाने में हुए पाप नष्ट हो जाते हैं. पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि जो फल काशी में स्नान करने से या केदारनाथ के दर्शन से मिलता है, वही पुण्य इस एक व्रत से प्राप्त होता है. सावन के पवित्र महीने में पड़ने के कारण इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है. इस दिन तुलसी की पूजा करने और श्री हरि के चरणों में तुलसी पत्र चढ़ाने से विशेष लाभ मिलता है. जो व्यक्ति पूरी निष्ठा से यह उपवास करता है, उसे मृत्यु के बाद उत्तम लोक की प्राप्ति होती है. जीवन के कष्ट दूर करने के लिए यह बहुत ही फलदायी माना गया है.
पूजन विधि और शुभ मुहूर्त का समय
कामिका एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और फिर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए. इसके बाद पूजा स्थान की सफाई करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें. श्री हरि को पीले फूल, पंचामृत और तुलसी के पत्ते अर्पित करें. 9 अगस्त को पूजा का सबसे उत्तम समय सुबह के समय रहेगा. पूरे दिन व्रत रखकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर पाठ करें. अगले दिन 10 अगस्त को सुबह 5:47 से 8:01 बजे के बीच पारण करके व्रत खोलना चाहिए. नियमानुसार समय पर पारण करने से ही पूर्ण फल प्राप्त होता है. शाम को मंदिर में घी का दीपक जलाकर आरती करने से मन में शांति बनी रहती है.
व्रत के नियम और सावधानियां
इस दिन मन में सात्विक विचार रखें और किसी के प्रति बुरे भाव न लाएं.
व्रत के दौरान चावल या भारी अनाज का सेवन करने से बचें.
स्वास्थ्य ठीक न होने की स्थिति में फलाहार करके भी व्रत रखा जा सकता है.
भगवान की पूजा में तुलसी पत्र अवश्य अर्पित करें क्योंकि इसके बिना पूजन अधूरा माना जाता है.
रात के समय भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना अत्यंत उत्तम होता है.
इस अवसर पर दान-पुण्य करने से जीवन की रुकावटें दूर होती हैं और शांति बनी रहती है.