Adhik Maas Masik Shivratri 2026: अधिकमास की मासिक शिवरात्रि कब है? जानें डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन महादेव और माता पार्वती विवाह के पवित्र बंधन में बंधे थे. इस दिन विधि-विधान से शिव-पार्वती का पूजन किया जाता है. इसके अलावा हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि मनाई जाती है. इसको मासिक शिवरात्रि कहा जाता है. इस शुभ अवसर पर भगवान शिव और मां पार्वती की साधना का विशेष फल मिलता है.

 

हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन महादेव और माता पार्वती विवाह के पवित्र बंधन में बंधे थे. इस दिन विधि-विधान से शिव-पार्वती का पूजन किया जाता है. इसके अलावा हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि मनाई जाती है. इसको मासिक शिवरात्रि कहा जाता है. इस शुभ अवसर पर भगवान शिव और मां पार्वती की साधना का विशेष फल मिलता है.

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन शिव जी और माता पार्वती का पूजन करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है. अभी अधिकमास चल रहा है. इस माह के व्रत और त्योहार का विशेष महत्व होता है, चूंकि ये माह तीन साल में एक बार आता है. अधिकमास की मासिक शिवरात्रि बहुत साख होती है. इस साल ज्येष्ठ अधिकमास की मासिक शिवरात्रि 13 जून को मनाई जाएगी. आइए जानते हैं इस दिन का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि.

अधिकमास मासिक शिवरात्रि तिथि 
पंचाग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 13 जून को दोपहर 04 बजकर 07 मिनट पर हो रही है.
इस तिथि का समापन 14 जून को 12 बजकर 19 मिनट पर होगा.
ऐसे में ज्येष्ठ अधिकमास की मासिक शिवरात्रि 13 जून को मनाई जाएगी.

अधिकमास मासिक शिवरात्रि शुभ मुहूर्त 
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 02 मिनट से 04 बजकर 42 मिनट तक रहेगा. अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा. विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 41 मिनट से 03 बजकर 37 मिनट तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त रात 07 बजकर 18 मिनट से 07 बजकर 39 मिनट तक रहेगा. निशिता मुहूर्त रात 11 बजकर 01 मिनट से 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगा.

मासिक शिवरात्रि पूजा विधि 
अधिकमास की मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. मंदिर में पर चौकी बिछाकर उस पर लाल कपड़ा बिछाएं. चौकी पर शिवलिंग की स्थापना करें. शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराएं और उस पर बेल पत्र अर्पित करें. शिवलिंग को फूलों और चंदन से सजाएं. दीपक जलाएं और धूप दें. शिवलिंग को फल और मिठाई का भोग लगाएं. ॐ नमः शिवाय, ॐ महादेवाय नमः मंत्र का जाप करें. शिव महापुराण की कथा सुनें. अंत में आरती करके पूजा का समापन करें.