शिपरॉकेट का आईपीओ 12 अगस्त को खुलेगा, 19 अगस्त को हो सकती है लिस्टिंग
नई दिल्ली, 06 अगस्त (हि.स.)। एसएमई और बड़े रिटेलर्स को ई-कॉमर्स सॉल्यूशन मुहैया कराने वाली कंपनी शिपरॉकेट ने अपने आईपीओ की लॉन्चिंग का ऐलान कर दिया है। कंपनी का 1,617.48 करोड़ रुपये का आईपीओ 12 अगस्त को खुलेगा। इस आईपीओ में निवेशक 14 अगस्त तक बोली लगा सकेंगे। वहीं एंकर इन्वेस्टर्स इस आईपीओ में 11 अगस्त को बोली लगा सकेंगे। इश्यू की क्लोजिंग के बाद 17 अगस्त को शेयरों का अलॉटमेंट किया जाएगा, जबकि 18 अगस्त को अलॉटेड शेयर डीमैट अकाउंट में क्रेडिट कर दिए जाएंगे। कंपनी के शेयर 19 अगस्त को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट हो सकते हैं।
इस आईपीओ में बोली लगाने के लिए 92 रुपये से लेकर 97 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है, जबकि लॉट साइज 154 शेयर का है। इस आईपीओ में रिटेल इनवेस्टर्स कम-से-कम एक लॉट यानी 154 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं, जिसके लिए उन्हें 14,938 रुपये का निवेश करना होगा। इसी तरह रिटेल इनवेस्टर्स 1,94,194 रुपये के निवेश से अधिकतम 13 लॉट में 2,002 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 16,67,61,566 शेयर जारी हो रहे हैं। इनमें लगभग 885 करोड़ रुपये के 9,12,99,203 नए शेयर जारी किए जा रहे हैं, जबकि लगभग 732 करोड़ रुपये के 7,54,62,363 शेयर ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) विंडो के जरिये बेचे जा रहे हैं।
इस आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए कम-से-कम 75 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व किया गया है। इसके अलावा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए अधिक से अधिक 10 प्रतिशत हिस्सा और नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (एनआईआई) के लिए अधिकतम 15 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व है। इस इश्यू के लिए एक्सिस कैपिटल लिमिटेड को बुक रनिंग लीड मैनेजर बनाया गया है। वहीं, केफिन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को रजिस्ट्रार बनाया गया है।
शिपरॉकेट की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत में लगातार सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 595.18 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में घट कर 74.45 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का शुद्ध घाटा मामूली बढ़त के साथ 79.25 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में इसे 1,357.83 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 1,674.82 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं, पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी को 2,077.42 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
इस अवधि में कंपनी के कर्ज के बोझ में मामूली उतार-चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पर 213.38 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 244.67 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो इस दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ मामूली गिरावट के साथ 242.01 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।
इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में ये 1,284.16 करोड़ रुपये के स्तर पर था। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का नेटवर्थ बढ़ कर 1,491.23 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में ये 1,524.29 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक