बीएसई और एनएसई के बाद अब देश को मिलेगा तीसरा स्टॉक एक्सचेंज एमएसई

 


- अगले दो सप्ताह में मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज शुरू हो सकती है एक्टिव ट्रेडिंग

नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के बाद अब देश को जल्दी ही मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (एमएसई) के रूप में एक तीसरा स्टॉक एक्सचेंज मिलने वाला है। माना जा रहा है कि अगले दो सप्ताह में मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज में एक्टिव ट्रेडिंग की शुरुआत हो सकती है। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए इस एक्सचेंज में खास योजना तैयार की गई है, जिसके तहत फिलहाल मार्केट मेकर्स की नियुक्ति की जा रही है। इस एक्सचेंज के जरिए फिलहाल 130 शेयरों के लिए लिक्विडिटी देने की तैयारी की गई है।

मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (एमएसई) के एक्टिव होने का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। शुरुआती कारोबार के लिए एमएसई ने दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में दो चरणों में 1,240 करोड़ रुपये जुटाए हैं। मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज में ग्रो और जेरोधा जैसी प्रमुख ब्रोकरेज फर्म ने मुख्य रूप से निवेश किया है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (एमएसई) के लिए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के मुकाबले खड़ा होना आसान नहीं होगा‌। फिलहाल बीएसई और एनएसई की पकड़ काफी मजबूत बनी हुई है। इसलिए एमएसई के लिए इसको तत्काल चुनौती देना आसान नहीं होगा। कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान का मानना है कि बीएसई और एनएसई की मजबूत पकड़ के साथ ही फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट में मार्केट रेगुलेटर सेबी के नियम भी एमएसई के लिए मुश्किल बढ़ाने का काम करेंगे।

सेबी के नियमों के अनुसार फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में वीकली एक्सपायरी मंगलवार और गुरुवार को होती है। फिलहाल इसमें बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं है। मौजूदा व्यवस्था में निफ्टी की एक्सपायरी मंगलवार को होती है, जबकि सेंसेक्स की एक्सपायरी गुरुवार को होती है। अगर सेबी के नियमों में बदलाव नहीं हुआ, तो एमएसई को भी एक्सपायरी के लिए मंगलवार या गुरुवार में से किसी एक दिन का चयन करना होगा। ऐसी स्थिति में एमएसई के लिए डेरिवेटिव्स में पकड़ बना पाना आसान नहीं होगा।

दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज, कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज, मगध स्टॉक एक्सचेंज जैसे छोटे स्टॉक एक्सचेंजों का दौर खत्म होने के बाद अब देश में स्टॉक मार्केट की लगभग पूरी गतिविधि बीएसई और एनएसई के जरिए ही होती है। जहां तक मार्केट शेयर की बात है, तो फिलहाल एनएसई के पास सबसे अधिक हिस्सेदारी है। कैश में एनएसई की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से अधिक है। वहीं स्टॉक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में इसकी हिस्सेदारी 95 प्रतिशत है, जबकि इंडेक्स फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में एनएसई की हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत है। दूसरी ओर, कैश में बीएसई की हिस्सेदारी 9 से 10 प्रतिशत के बीच है। स्टॉक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में बीएसई की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत तथा इंडेक्स फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक