उद्योग जगत को मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाने की जरूरत: वाणिज्य सचिव

 

 

 

नई दिल्ली, 11 मई (हि.स)। केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को घरेलू कंपनियों से आग्रह किया कि वे भारत द्वारा हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का लाभ उठाएं और वैश्विक गुणवत्ता मानकों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करें।

राजेश अग्रवाल ने नई दिल्ली में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित 'वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन 2026' को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, हमने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि हम केवल टैरिफ (शुल्क) तक ही सीमित न रहें। हम दोनों पक्षों के उद्योगों को 360-डिग्री की व्यापक पूर्वानुमान क्षमता और स्पष्टता प्रदान करते हैं, ताकि वे वास्तव में इन एफटीए का लाभ उठा सकें और ऐसे मार्ग प्रशस्त कर सकें, जो अधिक टिकाऊ विकास की ओर ले जाएं।

वाणिज्य सचिव ने कहा कि भारतीय उद्योग जगत को उन मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का लाभ उठाने और उनका उपयोग करने की आवश्यकता है, जिन्हें भारत अंतिम रूप दे रहा है। ये समझौते व्यापार और निवेश, दोनों के लिए बड़े अवसर प्रदान करते हैं। एफटीए का पूरी तरह से उपयोग करने और लाभ उठाने का देश का पिछला रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की औद्योगिक नीति को उसकी व्यापार नीति का पूरक होना चाहिए, क्योंकि व्यापार इस बात पर भी निर्भर करता है कि भारत कैसे निवेश और उत्पादन करता है।

मुक्त व्यापार समझौतों पर एक सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘एफटीए के उपयोग पर हमसे बार-बार सवाल पूछे जाते हैं। वास्तव में एफटीए से क्या लाभ मिल रहा है?’’ उन्होंने कहा कि भारत ने सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया और आसियान सहित कई देशों और समूहों के साथ व्यापार समझौते किए हैं। अग्रवाल ने कहा कि इन समझौतों से द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि हुई है, लेकिन भारत का निर्यात, आयात की तुलना में धीमी गति से बढ़ा है।

अग्रवाल ने मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ (ईयू), ब्रिटेन, ईएफटीए, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ व्यापार समझौतों के बारे में बात करते हुए कहा कि ये आधुनिक समझौते हैं और केवल शुल्क तक सीमित नहीं हैं। उद्योग और सरकार सहित सभी हितधारकों को इन समझौतों को देश के लिए उपयोगी बनाने को कदम उठाने की जरूरत है। इन एफटीए के उपयोग को बढ़ाने के लिए सूचनाओं का प्रसार और क्षमता निर्माण महत्वपूर्ण है।

------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर