बेरोजगारी दर मई में मामूली रूप से घटकर 5.5 फीसदी रही, श्रम भागीदारी में गिरावट

 




नई दिल्ली, 15 जून (हि.स)। देश में बेरोजगारी दर में मामूली गिरावट आई है। मई महीने में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के बीच बेरोजगारी की दर घटकर 5.5 फीसदी रह गई, जो एक साल पहले 5.6 फीसदी थी।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने सोमवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) की जारी सर्वेक्षण आंकड़ों में बताया कि बेरोजगारी दर सालाना आधार पर भले ही कम हुई है, लेकिन अप्रैल, 2026 के 5.2 फीसदी के मुकाबले इसमें कुछ बढ़ोतरी हुई है।

सर्वेक्षण के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर मई में बढ़कर 5.1 फीसदी हो गई, जो अप्रैल में 4.6 फीसदी थी। वहीं, शहरी बेरोजगारी दर घटकर 6.4 फीसदी रह गई, जो अप्रैल में 6.6 फीसदी थी। हालांकि, सालाना आधार पर शहरी बेरोजगारी की दर में 0.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

एनएसओ सर्वेक्षण के अनुसार मई में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) घटकर 54.4 फीसदी रह गई, जो अप्रैल महीने में 55 फीसदी थी। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में यह 56.6 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 49.8 फीसदी रही। सालाना आधार पर कुल एलएफपीआर में 0.4 फीसदी की गिरावट आई है। इसके अलावा श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी दर मई में 32.8 फीसदी रही है, जो मई, 2025 के 33.2 फीसदी से थोड़ा कम है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 36.7 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 24.8 फीसदी दर्ज की गई।

सर्वेक्षण के मुताबिक रोजगार में लगी आबादी का अनुपात (डब्ल्यूपीआर) मई में घटकर 51.4 फीसदी रह गया, जो अप्रैल में 52.2 फीसदी और मई, 2025 में 51.7 फीसदी फीसदी था। ग्रामीण क्षेत्रों में डब्ल्यूपीआई 53.8 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में डब्ल्यूपीआर 46.6 फीसदी रहा। मंत्रालय ने कहा कि श्रम बल भागीदारी दर एवं रोजगार अनुपात में कमी आने और बेरोजगारी दर में वृद्धि से यह संकेत मिलता है कि इस दौरान श्रम बाजार में कुछ नरमी आई।

सांख्यिकी मंत्रालय ने कहा कि श्रम भागीदारी में मामूली गिरावट के साथ रोजगार के अवसर अपेक्षाकृत तेजी से घटे, जिससे बेरोजगारों का अनुपात बढ़ा है। सरकार के अनुसार मई में आर्थिक गतिविधियों में मौसमी सुस्ती के कारण श्रम बाजार संकेतकों में यह गिरावट देखने को मिली। पीएलएफएस के तहत देशभर में 3,73,887 लोगों से जानकारी जुटाई गई। यह सर्वेक्षण देश में रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति का प्रमुख स्रोत है और जनवरी, 2025 से इसकी पद्धति में बदलाव कर मासिक और तिमाही आंकड़े जारी किए जा रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर