सिंक्रोनस कंडेंसर तकनीक से बीएचईएल को मिलेंगे नए कारोबारी अवसर : रंजन कुमार
हरिद्वार, 26 अगस्त (हि.स.)। बीएचईएल हरिद्वार के कार्यपालक निदेशक रंजन कुमार ने कहा कि भविष्य में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा के ग्रिड से जुड़ने के साथ ग्रिड की स्थिरता बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में सिंक्रोनस कंडेंसर प्रौद्योगिकी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी। यह तकनीक बीएचईएल के लिए नए व्यावसायिक अवसर भी पैदा कर सकती है।
बीएचईएल हरिद्वार स्थित मानव संसाधन विकास केंद्र (एचआरडीसी) में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए रंजन कुमार ने कहा कि सिंक्रोनस कंडेंसर के बढ़ते उपयोग को देखते हुए बीएचईएल इस क्षेत्र में अपनी तकनीकी और व्यावसायिक क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। कंपनी थर्मल क्षेत्र की तरह सिंक्रोनस कंडेंसर के बाजार में भी मजबूत स्थान बनाने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि बदलते ऊर्जा परिदृश्य में नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ विद्युत ग्रिड की स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना आवश्यक है। इस दिशा में सिंक्रोनस कंडेंसर महत्वपूर्ण तकनीकी समाधान के रूप में उभर रहा है।
महाप्रबंधक (ईएम) नरेंद्र सिंह राणा ने बताया कि सिंक्रोनस कंडेंसर वोल्टेज नियंत्रण, रिएक्टिव पावर सपोर्ट, शॉर्ट-सर्किट क्षमता बढ़ाने और ग्रिड की विश्वसनीयता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। महाप्रबंधक (मानव संसाधन) संतोष कुमार गुप्ता ने प्रतिभागियों से विषय विशेषज्ञों के अनुभव और तकनीकी मार्गदर्शन का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
बीएचईएल हरिद्वार और कॉरपोरेट आरएंडडी, हैदराबाद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में सिंक्रोनस कंडेंसर की डिजाइन, प्रौद्योगिकी, अनुप्रयोग, ग्रिड एकीकरण, निर्माण और परीक्षण के साथ ही भविष्य की व्यावसायिक संभावनाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ जानकारी दे रहे हैं।
कार्यक्रम में सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी, ट्रांसमिशन यूटिलिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड, ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया लिमिटेड, सेंट्रल ट्रांसमिशन यूटिलिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड और एनटीपीसी के विशेषज्ञों के साथ बीएचईएल के तकनीकी विशेषज्ञ प्रतिभागियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
इस अवसर पर अपर महाप्रबंधक डॉ. प्रताप चंद्र बेहेरा, आशा गुप्ता और हरीश सिंह बगवार सहित बीएचईएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला