अप्रैल में भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी, 10 अप्रैल तक बेचे 48,213 करोड़ रुपये के शेयर

 




नई दिल्ली, 12 अप्रैल (हि.स.)। घरेलू शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली लगातार जारी है। मार्च के महीने में जमकर बिकवाली करने के बाद अप्रैल के महीने में भी एफपीआई घरेलू बाजार में शुद्ध बिकवाल (नेट सेलर) की भूमिका में बने हुए हैं। 10 अप्रैल तक के कारोबार में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने घरेलू शेयर बाजार में 48,213 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।

इसके पहले अप्रैल के पहले सप्ताह के दो कारोबारी दिन एक और दो अप्रैल को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 19,837 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की थी। इसके बाद इस सप्ताह भी एफपीआई ने घरेलू शेयर बाजार में बिकवाली का सिलसिला जारी रखते हुए 5 दिन में 28,376 करोड़ रुपये के शेयर बेच कर अपना पैसा निकाल लिया।

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल के पहले मार्च के महीने में भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की थी। मार्च के महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अक्टूबर 2024 में एक महीने में सबसे अधिक बिक्री करने के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया।

अक्टूबर 2024 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 94,017 करोड़ रुपये की बिकवाली कर एक महीने में सबसे अधिक बिक्री का रिकॉर्ड बनाया था। इस रिकार्ड को मार्च के महीने में विदेशी निवेशकों ने पीछे छोड़ दिया। एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशक साल 2026 में घरेलू शेयर बाजार में बिकवाली कर 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी कर चुके हैं।

मार्च के पहले फरवरी 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने शेयर बाजार में खरीदारी का दम दिखाया था। इस महीने विदेशी निवेशकों ने इक्विटी मार्केट से 22,615 करोड़ रुपये के शेयर की खरीदारी की थी। अक्टूबर 2024 के बाद से ही शेयर बाजार में लगातार बने बिकवाली के माहौल के बीच फरवरी महीने में हुई खरीदारी पिछले 17 महीने के दौरान हुई सबसे बड़ी खरीदारी थी।

जानकारों का कहना है कि ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी जंग के कारण वैश्विक स्तर पर डर का माहौल बना हुआ है, जिसकी वजह से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। खासकर, इस युद्ध के कारण क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमत लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब बनी हुई है। इसी तरह रुपये की कमजोरी ने भी इक्विटी मार्केट में विदेशी निवेशकों की बिकवाली को बल दिया है। ऐसी स्थिति में विदेशी निवेशक घरेलू बाजार से अपना पैसा निकालने में लगे हुए हैं।

कैपेक्स गोल्ड एंड इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ राजीव दत्ता का कहना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के रुख में तत्काल बदलाव आने की संभावना नजर नहीं आ रही है। एफपीआई घरेलू शेयर बाजार में एक बार फिर खरीदारी तभी शुरू कर सकते हैं, जब उन्हें बाजार की स्थिति में सकारात्मक बदलाव होता हुआ नजर आए।

इन संभावित सकारात्मक बदलावों में प्रमुख रूप से पश्चिम एशिया में जारी तनाव कम होने, हॉर्मुज स्ट्रेट से मालवाहक जहाजों और ऑयल टैंकर्स की आवाजाही सामान्य होने, रुपये की स्थिति में सुधार होने और कंपनियों की चौथी तिमाही के नतीजे में सुधार होने की बात शामिल है। राजीव दत्ता के अनुसार अगर वैश्विक परिस्थितियों अनुकूल होती हैं तो एफपीआई के रुख में तेजी से बदलाव आ सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक