मार्च में बिकवाल की भूमिका में विदेशी निवेशक, चार कारोबारी दिन में 21 हजार करोड़ निकाले
नई दिल्ली, 08 मार्च (हि.स.)। फरवरी के महीने में खरीदारी का दम दिखाने के बाद मार्च के महीने में विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) एक बार फिर बिकवाल (सेलर) की भूमिका में आ गए हैं। पश्चिम एशिया में संकट शुरू होने के बाद पिछले चार कारोबारी दिनों के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों ने स्टॉक मार्केट से 21,000 करोड़ रुपये की निकासी कर ली है। इसके पहले फरवरी का महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने घरेलू शेयर बाजार में शुद्ध रूप से 22,615 करोड रुपये का निवेश किया था। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सितंबर 2024 के बाद पहली बार फरवरी के महीने में इतना बड़ा निवेश किया था।
फरवरी 2026 में जम कर खरीदारी करने के पहले लगातार तीन महीने तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध बिकवाल (सेलर) बने हुए थे। आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 में विदेशी निवेशकों ने 35,962 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। उसके पहले दिसंबर 2025 में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का आंकड़ा 22,611 करोड़ रुपये का था, जबकि नवंबर 2025 में विदेशी निवेशकों ने घरेलू शेयर बाजार में शुद्ध रूप से 3,765 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।
फरवरी के महीने में इस ट्रेंड में बदलाव हुआ और विदेशी निवेशकों ने घरेलू शेयर बाजार में जम कर खरीदारी की, लेकिन पश्चिम एशिया संकट की वजह से बने तनाव के कारण दो मार्च से लेकर छह मार्च के बीच के चार कारोबारी दिनों में ही विदेशी निवेशकों ने करीब 21 हजार करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री कर दी। तीन मार्च को होली की छुट्टी होने की वजह से शेयर बाजार में कोई कारोबार नहीं हुआ, वरना विदेशी निवेशकों की बिकवाली का ये आंकड़ा और अधिक हो सकता था।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे सैन्य तनाव की वजह से मार्केट में निगेटिव सेंटीमेंट्स बढ़ गए हैं। फिलहाल, अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान पर हमला कर रहे हैं। वहीं जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने भी मिडिल ईस्ट के कई देशों में अमेरिका के मिलिट्री बेस और इजरायल के ठिकानों को निशाना बना कर हमला किया है।
धामी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी का कहना है कि पश्चिम एशिया के तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमत भी में भी जोरदार तेजी आ गई है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। दूसरी ओर, डॉलर इंडेक्स में तेजी आने के कारण रुपये की कीमत में भी जबरदस्त गिरावट आई है। वहीं अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी हुई है, जिससे मार्केट सेंटीमेंट्स कमजोर हुए हैं।
प्रशांत धामी का कहना है कि पश्चिम एशिया तनाव और भविष्य को लेकर अनिश्चितता, स्टॉक मार्केट में जारी करेक्शन, रुपये की गिरावट डॉलर इंडेक्स की मजबूती और कच्चे तेल की कीमत में आए उछाल ने विदेशी निवेशकों को दुनिया भर के स्टॉक मार्केट में बिकवाली करने के लिए प्रेरित किया है, जिसकी वजह से शेयर बाजार में लगातार गिरावट का रुख बना हुआ है।
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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक