एफआईआई को फिर पसंद आने लगा भारतीय शेयर बाजार, फरवरी में विदेशी निवेशकों ने जमकर की खरीदारी

 


नई दिल्ली, 26 फरवरी (हि.स.)। साल 2025 के दौरान लगातार बिकवाल (सेलर) की भूमिका में बने रहे विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर दिलचस्पी बढ़ती हुई नजर आने लगी है। फरवरी महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने अभी तक करीब 244 करोड़ डॉलर की खरीदारी की है। इसमें सेकेंडरी मार्केट में विदेशी निवेशकों ने अभी तक करीब 214.05 करोड़ डॉलर की खरीदारी की है। वहीं प्राइमरी मार्केट में विदेशी निवेशकों ने 29.90 करोड डॉलर का शुद्ध निवेश किया है। इस तरह फरवरी का महीना घरेलू शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बावजूद पिछले 17 महीना के दौरान विदेशी निवेशकों के लिए सबसे अधिक मासिक निवेश वाला महीना बन गया है। इसके पहले सितंबर 2024 में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सेकेंडरी और प्राइमरी मार्केट मिला कर एक महीने में 595 करोड डॉलर का निवेश किया था।

शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से आईटी सेक्टर पर जबरदस्त दबाव बना हुआ है, जिसकी वजह से विदेशी निवेशक जमकर बिकवाली कर रहे हैं। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के अनुसार फरवरी के पहले दो सप्ताह के दौरान ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी चिंताओं के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 121 करोड़ से अधिक मूल्य के आईटी सेक्टर के शेयरों की बिकवाली की है। इस भारी भरकम बिकवाली के बावजूद घरेलू शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों का नेट इनफ्लो अभी तक लगभग 244 करोड़ डॉलर का हो चुका है।

जहां तक घरेलू शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों द्वारा की जा रही खरीदारी की बात है, तो प्राइमरी मार्केट में आईपीओ के जरिए विदेशी निवेशक अक्टूबर 2023 के बाद से ही लगातार खरीदारी करते रहे हैं। वहीं सेकेंडरी मार्केट में जुलाई 2025 के बाद पहली बार फरवरी के इस महीने में विदेशी निवेशकों ने बिकवाली से अधिक खरीदारी की है।

इसके पहले अक्टूबर 2025 में कुल आठ कारोबारी दिनों के दौरान विदेशी निवेशक लिवाल (नेट बायर) की भूमिका में नजर आए थे। उसके बाद विदेशी निवेशक लगातार बिकवाल (नेट सेलर) की भूमिका में ही बने रहे। अगर आंकड़ों की बात करें, तो जुलाई 2025 से लेकर जनवरी 2026 के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सेकेंडरी मार्केट से लगभग 2,000 करोड़ डॉलर की निकासी की। दूसरी ओर, इसी अवधि में उन्होंने प्राइमरी मार्केट के जरिए 641 करोड़ डॉलर का निवेश भी किया।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अक्टूबर 2024 के बाद से दिसंबर 2025 तक घरेलू शेयर बाजार बिकवाली के दबाव का सामना करता रहा। इसकी वजह से ज्यादातर प्रमुख कंपनियों के शेयरों का वैल्यूएशन काफी आकर्षक हो गया है। इसके साथ ही रुपये के मूल्य में आई कमजोरी की वजह से भी विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए भारतीय कंपनियों के शेयर तुलनात्मक तौर पर सस्ते हो गए हैं। एक बड़ी बात यह भी है कि पिछले लगभग डेढ़ साल की अवधि में जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और ताइवान की तुलना में कमजोर परफॉर्मेंस देने के बाद अब भारतीय बाजार का रीअसेसमेंट हो रहा है। ऐसे में विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार में एक बार फिर संभावना नजर आने लगी है।

धामी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी का कहना है कि सेंसेक्स अपने एक साल फॉरवर्ड के प्राइस-टू-अर्निंग (पीई) मल्टीपल के 20.50 गुना के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह निफ्टी 20.10 गुना के स्तर पर बना हुआ है। ये स्तर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों के 10 साल के औसत के बराबर है। वहीं ब्रॉडर मार्केट में बीएसई का मिडकैप इंडेक्स अपने एक साल के फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग के करीब 28 गुना के स्तर पर है। हालांकि इसका लॉन्ग टर्म एवरेज 27.3 गुना के आसपास माना जाता है।

धामी के अनुसार जापान को छोड़ कर एशिया के दूसरे बाजार की तुलना में भारत का फॉरवर्ड पीई प्रीमियम अपने लॉन्ग टर्म एवरेज पर लौट आया है। दरअसल, पिछले एक दशक के दौरान मार्केट में कोरियाई और चीनी के स्टॉक्स के कमजोर प्रदर्शन की वजह से भारत का प्रीमियम वैल्यूएशन लगातार बढ़ा था। हालांकि 2025 के दौरान भारतीय बाजार में लगातार हुए उतार-चढ़ाव और एशिया के अन्य शेयर बाजार में आई मजबूती की वजह से भारत का प्रीमियम वैल्यूएशन घट कर 40.10 प्रतिशत रह गया है, जो इसके 15 साल के एवरेज वैल्यूएशन 39.20 प्रतिशत के काफी करीब है।

इसी तरह जेरोधा कैपिटल्स एंड इन्वेस्टमेंट्स के सीईओ विक्रम मूलचंदानी का कहना है कि प्राइस-टू-बुक वैल्यू (पी/बीवी) के आधार पर भी इसी तरह का रुझान दिखता है। फिलहाल भारतीय स्टॉक मार्केट का 12 महीने का फॉरवर्ड प्राइस-टू-बुक वैल्यू अपने ऐतिहासिक एवरेज से ऊपर जरूर बना हुआ है, लेकिन एशिया के दूसरे बाजार के मुकाबले इसके स्तर में अधिक अंतर नहीं है। मूलचंदानी के अनुसार अक्टूबर 2024 से लगातार बिकवाली का दबाव बनाने के बाद विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर अपने कारोबारी रुख में बदलाव किया है। सिर्फ साल 2025 के दौरान ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 18.88 अरब डॉलर की बिकवाली की थी।

खासकर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मनमाने अंदाज में भारत पर टैरिफ लादे जाने की वजह से विदेशी निवेशकों की नजर में भारतीय बाजार की स्थिति लगातार गिरती चली गई थी। इसके साथ ही हाई वैल्यूएशन, वीक अर्निंग्स और डॉलर की मजबूती ने विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में नकारात्मक माहौल बना दिया था, लेकिन अब हालत में परिवर्तन होता हुआ नजर आने लगा है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स का ये भी कहना है कि अगर आने वाले दिनों में भी आईटी सेक्टर में बिकवाली जारी रही, तो विदेशी निवेशकों पर दूसरे सेक्टर्स को लेकर भी दबाव बन सकता है। ऐसा होने पर विदेशी निवेशक एक बार फिर लिवाल (बायर) की भूमिका छोड़ कर बिकवाल (सेलर) की भूमिका में आ सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक