पूंजी बाजार घरेलू बचत और संपत्ति सृजन का प्रमुख जरिया बन रहे : तुहिन कांत पांडेय
मुंबई, 08 जून (हि.स)। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने सोमवार को कहा कि भारत में पूंजी बाजार घरेलू बचत और संपत्ति सृजन का प्रमुख माध्यम बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह इस बात का संकेत है कि निवेश के तरीकों में एक संरचनात्मक बदलाव आया है, जिससे लोग तेजी से बाजार आधारित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।
तुहिन कांत पांडेय ने यहां ‘आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज इंडिया इंवेस्टर कॉन्फ्रेंस 2026’ को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने बताया कि भारत के कैपिटल मार्केट परिवारों की बचत और संपत्ति बनाने का एक अहम जरिया बनते जा रहे हैं। पांडेय ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में इक्विटी इश्यू 4.5 लाख करोड़ रुपये और कॉर्पोरेट बॉन्ड इश्यू 9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गए हैं। सेबी के चेयरमैन ने कहा कि पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) के नियमों पर उन्होंने संकेत दिया कि इस पर व्यापक विचार-विमर्श जारी है और जल्द ही एक परामर्श पत्र जारी किया जाएगा। हालांकि उन्होंने कोई समयसीमा बताने से इनकार किया। पांडेय ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति केवल ऊंची वृद्धि दर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अर्थव्यवस्था का औपचारिककरण, बचत का वित्तीयकरण और संस्थानों पर बढ़ता भरोसा भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि भारतीय बाजारों की गहराई बढ़ रही है और अब देश में प्रतिभूति बाजार में लगभग 14.5 करोड़ निवेशक हैं। इनकी संख्या हर साल 20 फीसदी से अधिक की दर से बढ़ रही है। सेबी प्रमुख ने बताया कि म्यूचुअल फंड संपत्ति करीब 12 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 80 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, जबकि पूंजी बाजार में घरेलू भागीदारी लगातार बढ़ रही है। पांडेय ने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में घरेलू वित्तीय बचत का हिस्सा वित्त वर्ष 2022-23 के लगभग 20 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 21.7 फीसदी हो गया है, जो विभिन्न वित्तीय साधनों में व्यापक भागीदारी के कारण संभव हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘ये सभी घटनाक्रम एक स्पष्ट बदलाव की ओर इशारा करते हैं’’ और अब घरेलू बचत का बड़ा हिस्सा बाजार-आधारित निवेश विकल्पों में जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में इक्विटी निर्गम 4.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि 366 आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिये लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए। कॉरपोरेट बॉन्ड निर्गम नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो पूंजी निर्माण में बाजारों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। सेबी प्रमुख ने कहा कि पूंजी बाजार, घरेलू बचत और संपत्ति सृजन का एक प्रमुख माध्यम बनते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाजार पूंजीकरण जीडीपी के लगभग 69 प्रतिशत (एक दशक पहले) से बढ़कर अब करीब 128 प्रतिशत हो गया है। पांडेय ने कहा कि निवेशकों की बढ़ती संख्या के साथ नियामकों और बाजार मध्यस्थों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि वे पारदर्शिता, निवेशक संरक्षण तथा बाजार की निष्पक्षता सुनिश्चित करें।
निवेशकों की भूमिका पर जोर देते हुए पांडेय ने कहा कि हर नियामकीय सुधार और बाजार पहल का अंतिम उद्देश्य निवेशकों का भरोसा मजबूत करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि निवेशक को सूचित, संरक्षित तथा निष्पक्ष व्यवहार का अनुभव होता है तो विश्वास बढ़ेगा, भागीदारी गहरी होगी और बाजार एक मजबूत एवं टिकाऊ आधार पर लगातार बढ़ते रहेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर