स्क्रैपेज-लिंक्ड ईवी प्रोत्साहन से लास्ट-माइल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मिल सकती है रफ्तार

 


नई दिल्ली, 26 मार्च (हि.स.)। दिल्ली सरकार द्वारा प्रस्तावित नई प्रोत्साहन योजना स्वच्छ परिवहन की दिशा में तेजी ला सकती है। खासकर लास्ट-माइल मोबिलिटी सेगमेंट में इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है, ऐसा उद्योग विशेषज्ञों का मानना है।

सरकार की प्रस्तावित नई प्रोत्साहन योजना के तहत पुराने वाहनों को स्क्रैप कर इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलाव करने पर एक लाख रुपये तक का लाभ दिए जाने का प्रावधान है। इसके तहत दिल्ली में पंजीकृत पुराने वाहनों के मालिक यदि अपने वाहन को अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्रों पर जमा कर छह महीने के भीतर नया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदते हैं, तो वे वित्तीय प्रोत्साहन के पात्र होंगे। इस योजना में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए ₹10,000, इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों के लिए ₹25,000 और इलेक्ट्रिक कारों के लिए ₹1 लाख तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। साथ ही कुछ ईवी श्रेणियों के लिए रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में भी छूट का प्रावधान है।

हालांकि, यह नीति कई वाहन श्रेणियों को कवर करती है, लेकिन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहन (ई3डब्ल्यू) को इसका सबसे अधिक लाभ मिलेगा, क्योंकि इनका उपयोग यात्री परिवहन और शहरी माल ढुलाई में व्यापक रूप से किया जाता है।

जुपेरिया ऑटो के सीईओ आयुष लोहिया ने कहा कि स्क्रैपेज-लिंक्ड प्रोत्साहन नीतियां पुराने, अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को इलेक्ट्रिक विकल्पों से बदलने की प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं, खासकर कमर्शियल मोबिलिटी सेगमेंट में।

भारत का इलेक्ट्रिक तीन पहिया बाजार देश के सबसे तेजी से बढ़ते ईवी सेगमेंट्स में से एक बन चुका है और कुल ईवी अपनाने में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। यह सेगमेंट लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, छोटे लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन और शहरी मोबिलिटी में अहम भूमिका निभाता है, जिससे यह भारत के सतत परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी बनता है।

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहन भारत के शहरी परिवहन इकोसिस्टम में ईवी अपनाने को तेज करने का सबसे व्यावहारिक माध्यम हैं। प्रोत्साहन से जुड़ी स्क्रैपेज नीतियां ड्राइवरों और छोटे फ्लीट ऑपरेटर्स के लिए शुरुआती लागत को कम करती हैं, जो अपनी रोज़मर्रा की आजीविका के लिए इन वाहनों पर निर्भर हैं। इलेक्ट्रिक तीनपहिया वाहनों का आर्थिक पक्ष पहले से ही मजबूत है, क्योंकि इनके संचालन की लागत पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों की तुलना में काफी कम होती है।

उन्होंने कहा कि कमर्शियल ऑपरेटर्स के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में बदलाव केवल पर्यावरणीय लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दीर्घकालिक परिचालन लागत में बचत भी प्रदान करता है। जब इसे नीतिगत प्रोत्साहनों का समर्थन मिलता है, तो पुराने वाहनों से इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर बदलाव कहीं अधिक तेज़ी से हो सकता है।

उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि पुराने वाहनों को हटाने को प्रोत्साहित करने वाली नीतियां शहरी प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ देश में पुराने ऑटो-रिक्शा और छोटे मालवाहक वाहनों के बड़े-बेड़े को आधुनिक बनाने में भी मदद कर सकती हैं। जैसे-जैसे शहर उत्सर्जन कम करने और वायु गुणवत्ता सुधारने के उपाय तलाश रहे हैं, स्क्रैपेज-लिंक्ड ईवी प्रोत्साहन भारत के लास्ट-माइल ट्रांसपोर्ट इकोसिस्टम के विद्युतीकरण को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी