कोलकाता में दो दिवसीय राइज कॉन्क्लेव का समापन, शोध को बाजार और उद्यम से जोड़ने पर जोर

 


कोलकाता, 07 सितंबर (हि.स.)। कोलकाता में आयोजित दो दिवसीय राइद कॉन्क्लेव 2026 का सोमवार को समापन हुआ। कॉन्क्लेव में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, उद्यमियों और स्टार्टअप से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य शोध, नवाचार, प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण और नए उद्यमों के निर्माण के बीच मजबूत संबंध स्थापित करना रहा।

कॉन्क्लेव के छठे संस्करण का उद्घाटन 6 सितंबर को वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के उपाध्यक्ष और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया था। उन्होंने प्रयोगशालाओं में विकसित स्वदेशी तकनीकों को बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सुविधाओं का उद्घाटन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। साथ ही कई महत्वपूर्ण संकलन भी जारी किए गए। कॉन्क्लेव में कुल आठ समझौता ज्ञापन, चार प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, दो उत्पादों का शुभारंभ और एक सुविधा का उद्घाटन हुआ।

दूसरे दिन चार परिचर्चाओं और एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इनमें महत्वपूर्ण खनिज और नई सामग्री, विज्ञान संचार, विज्ञान आधारित स्टार्टअप, विनिर्माण प्रौद्योगिकी तथा पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक नवाचार जैसे विषयों पर चर्चा हुई। परिचर्चाओं में एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड, इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड, ऊर्जा-पर्यावरण-जल परिषद, आकाशवाणी, इमामी लिमिटेड, टीसीजी क्रेस्ट, हिमाद्री स्पेशियलिटी केमिकल लिमिटेड, आई कैन नैनो, मासोजा टेक्नो सॉल्यूशन, वैरियनहब, पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन, जादवपुर विश्वविद्यालय, हिमालया वेलनेस कंपनी और लॉरियल इंडिया सहित विभिन्न संस्थानों और कंपनियों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

विशेष व्याख्यान का विषय ‘द लैब-टू-मार्केट लीप’ रहा। इसमें प्रयोगशालाओं में विकसित महत्वपूर्ण शोध और खोजों को बाजार आधारित उद्यमों में बदलने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

समापन समारोह में पश्चिम बंगाल सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जैव प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग एवं बागवानी विभाग के प्रभारी कैबिनेट मंत्री डॉ. कल्याण चक्रवर्ती ने शोध, उद्योग, सरकार, शोध संस्थानों, स्टार्टअप और उद्यमिता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में राइज की भूमिका को रेखांकित किया।

उन्होंने शोध से नवाचार और नवाचार से उद्यमिता तक की यात्रा को मजबूत करने की जरूरत बताई। साथ ही आत्मनिर्भरता, विकसित भारत और विकसित पश्चिम बंगाल के लक्ष्य को हासिल करने में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

कार्यक्रम के अंत में सीएसआईआर-सीजीसीआरआई, कोलकाता के निदेशक प्रो. बिक्रमजीत बसु ने धन्यवाद ज्ञापन किया। सीएसआईआर-सीएमईआरआई, दुर्गापुर के निदेशक डॉ. नरेश चंद्र मुर्मू और सीएसआईआर-आईआईसीबी, कोलकाता की निदेशक प्रो. विभा टंडन ने भी कार्यक्रम में योगदान दिया।

राइज कॉन्क्लेव 2026 ने शोध संस्थानों, उद्योग, स्टार्टअप, उद्यमियों और नीति निर्माताओं के बीच निरंतर संवाद और सहयोग के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराया। इसका उद्देश्य भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को तकनीक, उद्यम और व्यावहारिक समाधानों में बदलने की प्रक्रिया को गति देना है, ताकि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में विज्ञान एवं नवाचार की प्रभावी भूमिका सुनिश्चित की जा सके।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर