(लीड) धनतेरस पर रिकॉर्ड 1.25 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान : कैट
- देश के खुदरा व्यापार ने बनाया रिकॉर्ड, कारोबार 1.25 लाख करोड़ रुपये के पार
- सोने-चांदी का अकेले 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार का अनुमान
नई दिल्ली, 06 अक्टूबर (हि.स.)। इस साल धनतेरस पर देश भर से अभूतपूर्व खरीदारी की खबरें हैं। व्यापारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का कहना है कि आज के दिन देशभर में 1.25 करोड़ रुपये से भी अधिक का सामान बिके। यह भारतीय उपभोक्ताओं के मजबूत विश्वास, बढ़ती क्रय शक्ति और देश की घरेलू खुदरा अर्थव्यवस्था में आई नई ऊर्जा का परिचायक है।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं चांदनी चौक के सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि धनतेरस ने एक बार फिर भारत के पारंपरिक बाजारों की अपार ताकत और देश के व्यापारी समुदाय की जीवंतता को साबित किया है। उन्होंने कहा कि सोने-चांदी, ऑटोमोबाइल, बर्तन, रसोई के सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिजली के उपकरण, मां लक्ष्मी एवं भगवान गणेश की मूर्तियों सहित अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी ने देशभर में अभूतपूर्व व्यापारिक गतिविधियों को जन्म दिया है।
उन्होंने कहा कि धनतेरस पर इस साल बुलियन से लेकर ऑटोमोबाइल, बर्तनों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक बाजारों में उमड़ी खरीदारी की अभूतपूर्व लहर; स्वदेशी उत्पादों का बाजारों में दबदबा रहा। खंडेलवाल ने कहा कि इस वर्ष धनतेरस पर देशभर में खरीदारी का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला है। देश में धनतेरस के अवसर पर कुल व्यापार 1.25 लाख करोड़ रुपय से अधिक रहने का अनुमान है। यह भारतीय उपभोक्ताओं के मजबूत विश्वास, बढ़ती क्रय शक्ति और देश की घरेलू खुदरा अर्थव्यवस्था में आई नई ऊर्जा का परिचायक है।
धनतेरस के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए खंडेलवाल ने कहा कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाने वाला यह पर्व धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण धनतेरस को स्वास्थ्य, धन, समृद्धि और नए शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन की गई खरीदारी से तेरह गुना समृद्धि प्राप्त होती है। यही विश्वास इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण खरीदारी पर्वों में शामिल करता है।
सोने-चांदी के बाजारों में खरीदारी का अभूतपूर्व उत्साह
कैट के ज्वैलरी चैप्टर ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (एआईजेजीएफ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा के अनुसार, पिछले कई दिनों से देशभर के आभूषण बाजारों में ग्राहकों की असाधारण भीड़ देखने को मिली है।
उन्होंने बताया कि देशभर में सोने और चांदी का कारोबार अकेले 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है, जबकि दिल्ली के बुलियन बाजारों में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार दर्ज किया गया है। कीमती धातुओं की ऊंची कीमतों के बावजूद ग्राहकों का सोने-चांदी की खरीदारी के प्रति उत्साह बरकरार रहा। विशेष रूप से हल्के वजन के आभूषणों, पारंपरिक गहनों, चांदी के सिक्कों और शुभ निवेश के रूप में सोने-चांदी की खरीदारी को प्राथमिकता दी गई।
पंकज अरोड़ा ने बताया कि आज सोने का भाव लगभग 1 लाख 44 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम रहा, जबकि धनतेरस से पहले यह लगभग 1 लाख 30 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम पर था। इसी प्रकार चांदी का भाव लगभग 1 लाख 90 हजार रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जबकि पहले यह लगभग 1 लाख 70 हजार रुपये प्रति किलोग्राम था। इसके बावजूद ग्राहकों ने खरीदारी में उत्साह दिखाया।
धनतेरस : अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र को गति देने वाला पर्व
खंडेलवाल ने कहा कि धनतेरस की विशेषता यह है कि इसका आर्थिक प्रभाव केवल सोने-चांदी तक सीमित नहीं है। इस दिन तांबे, चांदी और स्टील के नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। वहीं, पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार झाड़ू खरीदने को दरिद्रता और नकारात्मकता दूर करने तथा मां लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक माना जाता है।
आधुनिक समय में धनतेरस मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, टेलीविजन, घरेलू उपकरणों, बिजली के सामान, ऑटोमोबाइल और अन्य आधुनिक उपभोक्ता वस्तुओं की खरीदारी का भी एक बड़ा अवसर बन गया है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष त्योहारी कारोबार में आई उल्लेखनीय तेजी के पीछे जीएसटी दरों में की गई महत्वपूर्ण कटौती और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘स्वदेशी अपनाओ’ के आह्वान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उपभोक्ताओं में भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है, जिससे देश के घरेलू निर्माताओं, छोटे व्यापारियों, स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और एमएसएमई क्षेत्र को बड़ा लाभ मिला है।
पारंपरिक बाजार बने त्योहारी और आर्थिक गतिविधियों के केंद्र
खंडेलवाल ने कहा कि इस बार खरीदारी का उत्साह केवल बड़े शॉपिंग मॉल और आधुनिक रिटेल प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रहा। देशभर के पारंपरिक बाजारों, ज्वैलरी बाजारों, बर्तन बाजारों, ऑटोमोबाइल शोरूम, इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट और स्थानीय दुकानों में ग्राहकों की भारी भीड़ और शानदार व्यापारिक गतिविधियां देखने को मिली हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों के प्रति बढ़ता आकर्षण उपभोक्ताओं और देश की घरेलू व्यापारिक व्यवस्था के बीच संबंधों को और मजबूत कर रहा है। इससे त्योहारी खरीदारी के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, स्वदेशी उद्यमों को प्रोत्साहन मिल रहा है और देश की अर्थव्यवस्था में धन का प्रवाह मजबूत हो रहा है।
अंत में खंडेलवाल ने कहा कि धनतेरस और दीपावली अब केवल धार्मिक आस्था और पारंपरिक उत्सवों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि ये भारत की आर्थिक प्रगति के शक्तिशाली वाहक बन चुके हैं। धनतेरस पर 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक के अनुमानित कारोबार का आंकड़ा देश में बढ़ते उपभोक्ता विश्वास, घरेलू बाजारों की मजबूती और भारतीय समाज की बढ़ती आकांक्षाओं का स्पष्ट प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों की प्रत्येक खरीदारी आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को सशक्त बनाने में योगदान देती है। इस प्रकार स्वदेशी की भावना ही इस त्योहारी सीजन की सबसे बड़ी पहचान बनकर उभरी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर