सेवा उत्पादन सूचकांक को 60 दिन के अंतराल पर जारी करने की सिफारिश
नई दिल्ली, 07 जुलाई (हि.स)। विशेषज्ञों की एक समिति ने क्षेत्रवार सूचकांक हर महीने तैयार करने और सेवा उत्पादन सूचकांक को संदर्भ महीने के 60 दिन के भीतर जारी करने की सिफारिश की है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि सांख्यिकी मंत्रालय ने मई 2025 में नीति आयोग की विशिष्ट फेलो देबजानी घोष की अध्यक्षता में सेवा उत्पादन सूचकांक (आईएसपी) पर एक तकनीकी परामर्श समिति बनाई थी। इसमें शिक्षा और उद्योग संगठन के प्रतिनिधियों के अलावा, उत्पादन सूचकांक पर तकनीकी परामर्श में सेवा क्षेत्र से संबंधित मंत्रालयों/विभागों के सदस्य भी शामिल हैं। यह रिपोर्ट 2024-25 को आधार वर्ष मानते हुए, 2-अंकीय एनआईसी 2025 स्तर पर संकलन और सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) भार का उपयोग करके एकत्रीकरण के लिए लास्पेयर्स वॉल्यूम इंडेक्स की अनुशंसा करती है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने कहा कि लंबी चर्चा और बातचीत के बाद सेवा उत्पादन सूचकांक (आईएसपी) पर एक तकनीकी परामर्श समिति (टीएसी-आईएसपी) की रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया गया है। पिछले एक साल में समिति ने आईएसपी तैयार करने की धारणा, तौर-तरीकों और परिचालन पहलुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। सलाह-मशविरे की प्रक्रिया के तहत 27 अप्रैल 2026 को आईएसपी तैयार करने के तरीके पर एक दृष्टिकोण पत्र सार्वजनिक किया गया था, जिसमें संबंधित पक्षों से राय और सुझाव मांगे गए थे।
मंत्रालय ने बताया कि यह रिपोर्ट अर्थव्यवस्था के संगठित क्षेत्र के लिए मासिक आईएसपी तैयार करने को लेकर एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करती है। रिपोर्ट में कहा गया कि इसका मकसद उपयोगकर्ताओं को 14 जुलाई 2026 को (परीक्षण) आईएसपी श्रृंखला जारी होने से पहले प्रस्तावित आईएसपी रूपरेखा को बेहतर ढंग से समझने और अपनाने में मदद करना है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने कहा कि आईएसपी, औद्योगिक उत्पादन का पूरक होगा और पहली बार भारत की अर्थव्यवस्था के संगठित क्षेत्र में कम समय के बदलावों का मासिक आधार पर जानकारी देगा। हालांकि इसमें कहा गया है जीएसटी व्यापार, खाद्य सेवाएं, दूरसंचार, पेशेवर सेवाएं आदि जैसी बाजार-आधारित सेवाओं को बड़े पैमाने पर कवर करता है, लेकिन स्वास्थ्य और शिक्षा, रेलवे का एक बड़ा हिस्सा, स्वास्थ्य बीमा, जरूरी सामान का परिवहन आदि जैसी कुछ सेवाएं जिसे माल एवं सेवा कर से छूट प्राप्त हैं उन्हें दूसरे स्रोतों से कवर करने की जरूरत है।
उल्लेखनीय है कि सेवा क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे तेजी से बढ़ने वाला और गतिशील हिस्सा है। यह भारत के सकल मूल्य वर्धन में लगभग 53 फीसदी का योगदान देता है, बड़ी संख्या में रोजगार पैदा करता है और आर्थिक वृद्धि, निवेश और निर्यात का मुख्य चालक बनकर उभरा है। प्रस्तावित आईएसपी देश की सांख्यिकीय प्रणाली को मजबूत करने और सेवा क्षेत्र की माप में सुधार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर