राजस्थान का माइक्रो बिजनेस क्रेडिट बाजार 2.01 लाख करोड़ रुपए पहुंचा
जयपुर, 28 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्थान में छोटे कारोबारियों की कर्ज लेने की प्रवृत्ति में बदलाव आ रहा है। पिछले तीन साल में कारोबार के लिए व्यक्तिगत रूप से कर्ज लेने वाले उद्यमियों का बकाया 20 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ा है, जबकि माइक्रो बिजनेस के नाम पर लिए गए कर्ज में 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जून 2026 तक राज्य का माइक्रो बिजनेस क्रेडिट बाजार 2.01 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। यह जानकारी ट्रांसयूनियन सिबिल और नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (एनएसआईसी) की संयुक्त रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 तक राजस्थान के करीब 31.2 लाख ऐसे व्यक्तिगत उद्यमी थे, जिन्होंने कभी कारोबार की औपचारिक इकाई के रूप में कर्ज नहीं लिया। इनमें से 65 प्रतिशत का सिबिल स्कोर 730 से अधिक था। इससे स्पष्ट होता है कि अच्छी व्यक्तिगत क्रेडिट प्रोफाइल रखने वाले अनेक उद्यमियों को औपचारिक कारोबारी कर्ज से जोड़ने की संभावना है।
राजस्थान में माइक्रो बिजनेस के बकाया कर्ज में व्यापार की हिस्सेदारी 39 प्रतिशत और विनिर्माण क्षेत्र की 20 प्रतिशत है। विनिर्माण में खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े कर्ज में पिछले तीन साल में 17 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर से वृद्धि हुई। संपत्ति के बदले कर्ज (एलएपी) की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत और वाणिज्यिक वाहन कर्ज की 20 प्रतिशत है। व्यक्तिगत कारोबारी कर्ज में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की हिस्सेदारी करीब 39 प्रतिशत है, जिसमें वाणिज्यिक वाहन कर्ज की प्रमुख भूमिका है।
रिपोर्ट के मुताबिक जून 2026 तक देशभर में माइक्रो बिजनेस उद्यमियों पर 29.6 लाख करोड़ रुपए का वाणिज्यिक कर्ज बकाया था। इसमें 19.1 लाख करोड़ रुपए व्यक्तिगत रूप से कारोबार के लिए कर्ज लेने वालों और 10.5 लाख करोड़ रुपए माइक्रो बिजनेस इकाइयों पर बकाया थे। पिछले तीन साल में व्यक्तिगत कारोबारी कर्ज 21 प्रतिशत, जबकि माइक्रो बिजनेस कर्ज 12 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ा।
देश में करीब 3.9 करोड़ व्यक्तिगत कारोबारी कर्जदारों ने मार्च 2026 तक कभी औपचारिक उद्यम के रूप में कर्ज नहीं लिया था। इनमें 63 प्रतिशत का सिबिल स्कोर 730 से अधिक था और 54 प्रतिशत को दो साल या उससे अधिक समय से कारोबारी कर्ज लेने का अनुभव था।
राजस्थान में व्यक्तिगत कारोबारी कर्ज का 47 प्रतिशत हिस्सा एबव प्राइम श्रेणी में रहा। वहीं, 90 दिन से अधिक समय तक भुगतान बकाया रहने की दर तीन साल में करीब 39 आधार अंक घटकर 1.4 प्रतिशत रह गई। देश में माइक्रो बिजनेस कर्ज की कुल भुगतान चूक दर जून 2023 के करीब 3 प्रतिशत से घटकर जून 2026 में 1.9 प्रतिशत हो गई।
ट्रांसयूनियन सिबिल के मुख्य उत्पाद अधिकारी एजाज नजीर के अनुसार कारोबारियों को कार्यशील पूंजी और औपचारिक उद्यम कर्ज तक बेहतर पहुंच मिलने से उनके कारोबार के विस्तार में मदद मिल सकती है। वहीं, एनएसआईसी के उप महाप्रबंधक कृष्ण गोपाल जायसवाल ने कहा कि राजस्थान में अच्छे क्रेडिट रिकॉर्ड वाले उद्यमियों को औपचारिक कारोबारी कर्ज से जोड़ना जरूरी है। इसके लिए कच्चे माल की सहायता, बैंक ऋण सुविधा, बिल डिस्काउंटिंग और बाजार तक पहुंच जैसी योजनाएं उपयोगी हो सकती हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश