पारस हेल्थकेयर का आईपीओ कल होगा लॉन्च, 23 अक्टूबर तक लगा सकेंगे बोली
नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर भारत, बिहार और झारखंड में पारस हेल्थ ब्रांड के तहत सुपर स्पेशलिटी केयर और हाईली एडवांस्ड (क्वाटर्नरी) हेल्थकेयर सेवा देने वाली देश की प्रमुख क्लिनिकल स्पेशलिटी हॉस्पिटल चेन कंपनी पारस हेल्थकेयर लिमिटेड का 1,450 करोड़ रुपये का आईपीओ कल यानी 21 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए लॉन्च कर दिया जाएगा। इस आईपीओ में निवेशक 23 अक्टूबर तक बोली लगा सकते हैं। इश्यू की क्लोजिंग के बाद 26 अक्टूबर को शेयरों का अलॉटमेंट किया जाएगा, जबकि 27 अक्टूबर को अलॉटेड शेयर निवेशकों के डीमैट अकाउंट में क्रेडिट कर दिए जाएंगे। इसी दिन रिफंड की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट हो सकते हैं।
इस आईपीओ में बोली लगाने के लिए 660 रुपये से लेकर 693 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है, जबकि लॉट साइज 21 शेयरों का है। इस आईपीओ में रिटेल इंवेस्टर्स कम से कम एक लॉट यानी 21 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं, जिसके लिए उन्हें 14,553 रुपये का न्यूनतम निवेश करना होगा। इसी तरह रिटेल इनवेस्टर अधिकतम 1,89,189 रुपये के निवेश से 13 लॉट में 273 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं। इस आईपीओ के तहत एक रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 2,09,23,520 शेयर जारी किए जा रहे हैं। इनमें लगभग 500 करोड़ रुपये के 72,15,007 नए शेयर जारी किए जा रहे हैं, जबकि लगभग 950 करोड़ रुपये के 1,37,08,513 शेयर ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) विंडो के जरिये प्रमोटर्स द्वारा बेचे जा रहे हैं।
इस आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए अधिकतम 75 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व किया गया है। इसके अलावा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए न्यूनतम 10 प्रतिशत हिस्सा और नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (एनआईआई) के लिए न्यूनतम 15 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व रखा गया है। इस पूरे इश्यू के लिए जेएम फाइनेंशियल लिमिटेड, बोफा सिक्योरिटीज और नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट लिमिटेड को बुक रनिंग लीड मैनेजर्स बनाया गया है, जबकि एमयूएफजी इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है।
पारस हेल्थकेयर लिमिटेड की वित्तीय स्थिति की बात करें, तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए दस्तावेजों में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कंपनी की वित्तीय सेहत में पिछले तीन वित्त वर्षों के दौरान शानदार सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 15.33 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा (नेट लॉस) हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में और बढ़ कर 57.98 करोड़ रुपये के स्तर पर बना रहा। हालांकि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी घाटे से उबर कर शानदार वापसी करने में सफल रही और उसका शुद्ध लाभ (प्रॉफिट आफ्टर टैक्स) उछल कर 43.83 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी को 49.68 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका था।
इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 1,151.02 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 1,314.21 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की कुल राजस्व प्राप्ति में और इजाफा हुआ, जिससे यह बढ़ कर 1,628.78 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी को 478.75 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हो चुका था।
इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पर कुल 923.92 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 1,232.12 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ और बढ़ कर 1,393.86 करोड़ रुपये हो गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी पर कुल 1,429.49 करोड़ रुपये का भारी कर्ज लदा हुआ था।
कंपनी की कुल संपत्ति में भी इस दौरान लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में पारस हेल्थकेयर लिमिटेड की कुल संपत्ति 1,477.66 करोड़ रुपये के स्तर पर थी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 1,810.45 करोड़ रुपये हो गई। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की कुल संपत्ति बढ़कर 2,071.14 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अंत में कंपनी की कुल संपत्ति 2,202.88 करोड़ रुपये दर्ज की गई।
रिजर्व और सरप्लस की बात करें, तो कंपनी ने इस मोर्चे पर थोड़ा उतार-चढ़ाव देखा, लेकिन अंत में मजबूती दर्ज करने में सफल रही। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 328.75 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में घट कर 270.73 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि वित्त वर्ष 2025-26 के अंत में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस फिर से बढ़ कर 384.84 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक यह और बढ़कर 434.86 करोड़ रुपये हो चुका था।
इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी उतार चढ़ाव के बावजूद सुधार देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी का नेटवर्थ 338.51 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घट कर 280.49 करोड़ रुपये हो गया था। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का नेटवर्थ फिर से सुधर कर 394.94 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अंत में कंपनी का नेटवर्थ 444.96 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
इसी तरह कंपनी के ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) में भी लगातार मजबूत उछाल देखने को मिला। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी का ईबीआईटीडीए 154.41 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में मामूली बढ़त के साथ 156.46 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का ईबीआईटीडीए उछल कर 335.58 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 तक कंपनी का ईबीआईटीडीए 113.48 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।
-----------
हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक