एनसीएलएटी ने खारिज की जेपी मामले में अडाणी समूह की बोली के विरुद्ध वेदांता की अपील
नई दिल्ली, 04 मई (हि.स)। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता लिमिटेड की दो याचिकाएं खारिज कर दीं हैं। कंपनी ने इन याचिकाओं में कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की बोली के चयन को चुनौती दी थी। इससे पहले इस मामले में वेदांता लिमिटेड को सुप्रीम कोर्ट में भी निराशा हाथ लगी थी।
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुन मित्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) के पूर्व आदेश को बरकरार रखा और कहा कि निर्णय लेने वाले प्राधिकरण के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। पीठ ने कहा कि अपील में कोई दम नहीं है। दोनों अपीलें खारिज की जाती हैं। कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है।
एनसीएलएटी ने पाया कि 14 नवंबर, 2025 को हुई अपनी 24वीं बैठक में समिति द्वारा परिशिष्ट पर विचार न करने का निर्णय न तो अमान्य था और न ही अनुचित। वेदांता ने मूल्यांकन मानदंड पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उसकी बोली सकल मूल्य के लिहाज से 3,400 करोड़ रुपये अधिक और शुद्ध वर्तमान मूल्य (एनपीवी) के आधार पर लगभग 500 करोड़ रुपये अधिक थी। इसे खारिज करते हुए एनसीएलएटी ने कहा कि सीओसी द्वारा उच्च मूल्य वाली योजना को मंजूरी न देना 'मनमाना या अनुचित' नहीं कहा जा सकता।
कंपनी विधि न्यायाधिकरण की इलाहाबाद पीठ ने 17 मार्च को जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के अधिग्रहण के लिए अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दी थी, जिसे वेदांता ने एनसीएलएटी में चुनौती दी थी। वेदांता ने इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में भी चुनौती दी थी लेकिन शीर्ष अदालत ने रोक लगाने से इनकार कर दिया।
जेपी समूह की प्रमुख कंपनी जेएएल को 57,185 करोड़ रुपये कर्ज के भुगतान में चूक के बाद जून, 2024 में कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में शामिल किया गया था। अडाणी एंटरप्राइजेज ने जेएएल के लिए लगाई बोली में वेदांता लिमिटेड और डालमिया भारत को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की। अडाणी एंटरप्राइजेज को कर्जदाताओं के सर्वाधिक 89 फीसदी मत मिले थे।
जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के लिए अडाणी समूह की समाधान योजना को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण से मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही इसके प्रोसेस को चुनौती देने वाली वेदांता समूह की याचिका को खारिज कर दिया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर