देशभर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल, पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग
नई दिल्ली, 11 सितंबर (हि.स.)। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शुक्रवार को देशव्यापी हड़ताल से बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हुईं हैं। पांच दिवसीय कार्य सप्ताह और अन्य वेतन संबंधी मुद्दों को लेकर कर्मचारियों ने विरोध-प्रदर्शन किया, जिससे ग्राहकों को परेशानी हुई। हालांकि, निजी क्षेत्र के बैंकों के कामकाज पर हड़ताल का असर नहीं पड़ा है।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) के एक दिवसीय हड़ताल के आह्वान का निजी क्षेत्र के बैंकों के कामकाज पर असर नहीं पड़ा है।यूपीआई और इंटरनेट बैंकिंग सहित डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहीं। स्टेट बैंक, पीएनबी और यूनियन बैंक सहित देशभर के सरकारी और कुछ निजी बैंक आज से लगातार तीन दिन बंद रहेंगे। यूएफबीयू ने पांच दिवसीय कार्य सप्ताह तत्काल लागू करने और वेतन संबंधी 2 साल से लंबित मुद्दों के समाधान की मांग को लेकर देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस बीच, सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकतर बैंकों ने अपने ग्राहकों को हड़ताल से कामकाज पर पड़ने वाले संभावित असर की जानकारी दी है।
देशभर में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की अधिकतर शाखाएं पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद रहीं, क्योंकि अधिकांश कर्मचारियों और अधिकारियों ने इस हड़ताल में हिस्सा लिया। इस हड़ताल से ज्यादातर बैंकों (पीएसबी) और कुछ पुराने निजी क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं में नकद जमा, निकासी, चेक निपटान और प्रशासनिक कामकाज जैसी सेवाएं प्रभावित हुईं। एसबीआई ने ग्राहकों को जारी एक परामर्श में कहा कि बैंक ने हड़ताल के दिनों में शाखाओं और कार्यालयों का सामान्य कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की हैं, लेकिन हड़ताल के कारण बैंकों का कामकाज प्रभावित होने की आशंका है।
बैंक यूनियन सभी शनिवार को अवकाश घोषित करने की मांग कर रही हैं। यह एक प्रमुख मांग है, जिस पर मार्च, 2024 में भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के साथ हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते में कथित तौर पर सहमति बनी थी, लेकिन इस संबंध में सरकार की अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है। फिलहाल बैंक महीने के पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को खुले रहते हैं। इसके अलावा पेंशन में संशोधन एवं सुधार, सभी पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते के एक समान सूत्र तथा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) में जाने का विकल्प देने समेत अन्य लंबित मांगों का भी समाधान नहीं हुआ है।
बैंकों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने और अन्य लंबित मांगों को लेकर देशव्यापी हड़ताल के कारण मध्यप्रदेश में लगभग 7 हजार शाखाओं में काम ठप रहा, जिससे करीब 5,500 करोड़ रुपये का दैनिक कारोबार प्रभावित हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर