बीते 5 सालों में हर मुहूर्त ट्रेडिंग पर चमके सेंसेक्स-निफ्टी, इस बार भी तेजी की उम्मीद

 




नई दिल्ली, 07 नवंबर (हि.स.)। दिवाली के दिन होने वाला विशेष मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए ज्यादातर शुभ और मुनाफे वाला साबित हुआ है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि इस एक घंटे के विशेष सत्र में ज्यादातर मौकों पर बाजार में बढ़त के साथ ही कारोबार हुआ है। इस दौरान देश के दोनों प्रमुख सूचकांक, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी, हर बार अपनी मजबूती हासिल करने में सफल रहे हैं और लगातार हरे निशान में बंद होकर निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान लेकर आए हैं। आपको बता दें कि इस साल भी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में रविवार को दोपहर बाद 2:20 बजे से लेकर 3:30 बजे तक मुहूर्त ट्रेडिंग होगी।

अगर पिछले साल यानी संवत 2082 के दौरान साल 2025 में आयोजित मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र की बात करें, तो बाजार में मामूली बढ़त देखी गई थी। इस सत्र में निफ्टी ने 0.10 प्रतिशत और सेंसेक्स ने 0.07 प्रतिशत की हल्की मजबूती दर्ज की थी, जिसमें मुख्य रूप से रक्षा और ऑटो सेक्टर्स का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा था। इससे पहले साल 2024 में आयोजित सत्र में बाजार ने और भी बेहतर प्रदर्शन किया था। तब दोनों ही सूचकांकों में करीब 0.40 प्रतिशत से ज्यादा की सकारात्मक बढ़त देखी गई थी और उस समय निवेशकों ने बैंकिंग व इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर्स में जमकर खरीदारी की थी।

साल 2023 में दिवाली के दिन बाजार में मजबूत लिवाली का माहौल देखने को मिला था। इस सत्र में निफ्टी में 0.51 प्रतिशत और सेंसेक्स में 0.54 प्रतिशत का बड़ा उछाल आया था, जहां आईटी और रियल्टी सेक्टर्स ने बाजार की तेजी की कमान संभाली थी। पिछले पांच सालों का सबसे बेहतरीन और ऐतिहासिक मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र साल 2022 में देखने को मिला था। चौतरफा तेजी के उस दौर में दोनों ही प्रमुख सूचकांकों ने 0.87 प्रतिशत की जोरदार छलांग लगाकर निवेशकों को गदगद कर दिया था। वहीं साल 2021 में भी बाजार अपने रिकॉर्ड हाई के स्तर पर होने के बावजूद मुहूर्त सत्र में 0.49 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ था।

मुहूर्त ट्रेडिंग का यह विशेष सत्र महज एक घंटे का होता है, इसलिए इसमें सामान्य दिनों के मुकाबले ट्रेडिंग वॉल्यूम काफी कम रहता है। इसके बावजूद कुछ खास सेक्टर्स में विदेशी व घरेलू संस्थागत निवेशकों के साथ-साथ रिटेलर्स की टोकन बाइंग यानी शुभ निवेश बहुत मजबूत दिखाई देता है। पिछले पांच सालों में बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर्स में सबसे ज्यादा निरंतरता और मजबूती देखी गई है, जबकि वैश्विक मंदी की चिंताओं के चलते आईटी और मेटल्स सेक्टर्स में कई बार मुनाफावसूली या सुस्ती भी दर्ज की गई।

चूंकि यह सत्र प्रतीकात्मक और शुभ निवेश का होता है, इसलिए देश की दिग्गज लार्ज-कैप कंपनियों में ही सबसे ज्यादा हलचल होती है। पिछले पांच सालों के ट्रेंड में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले शेयरों में महिंद्रा एंड महिंद्रा सबसे आगे रहा है, जिसने ऑटो सेक्टर की मांग के चलते कई बार दो से तीन प्रतिशत तक का इंट्रा-डे उछाल दिखाया है। इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक, आभूषणों की भारी बिक्री के सेंटीमेंट के कारण टाइटन कंपनी, इन्फोसिस और लार्सन एंड टुब्रो जैसी हैवीवेट कंपनियों में भी हर साल लंबी अवधि के निवेशकों द्वारा सुरक्षित खरीदारी की जाती रही है।

दूसरी तरफ सीमित समय होने के कारण कुछ दिग्गज शेयरों में शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स की मुनाफावसूली से गिरावट भी देखी गई। इनमें वैश्विक खर्चों में कटौती की चिंताओं के चलते टेक महिंद्रा और विप्रो जैसे आईटी शेयरों पर अक्सर दबाव देखा गया, जबकि टाटा स्टील ने अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव के कारण सुस्ती दिखाई। वहीं पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन और कोल इंडिया जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के शेयर वॉल्यूम कम होने के कारण अक्सर सपाट या हल्के लाल निशान में बंद होते रहे हैं।

बाजार के बड़े विश्लेषकों और फंड मैनेजर्स का मानना है कि मुहूर्त ट्रेडिंग के महज एक घंटे का प्रदर्शन यह तय नहीं करता कि आने वाला पूरा साल या नया संवत कैसा रहने वाला है। यह सत्र केवल एक शुभ शुरुआत और हमारी सांस्कृतिक आस्था का हिस्सा है। इसलिए अनुभवी एक्सपर्ट्स निवेशकों को यही सलाह देते हैं कि केवल एक घंटे की तेजी देखकर किसी भी कमजोर फंडामेंटल वाली कंपनी या पेनी स्टॉक में पैसा लगाने से बचना चाहिए। समझदारी इसी में है कि लार्ज-कैप, मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों और लंबी अवधि के निवेश यानी एसआईपी या म्यूचुअल फंड के जरिए नए संवत की सुरक्षित शुरुआत की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक