वैश्विक आर्थिक संकटों के बीच भारत सबसे लचीली व मजबूत अर्थव्यवस्था : मूडीज
नई दिल्ली, 05 मई (हि.स)। वैश्विक भू-राजनीतिक संकटों के बीच भारत उभरते बाजारों में 2020 के बाद से सबसे लचीली और मजबूत अर्थव्यवस्था बना हुआ है। वैश्विक झटकों के दौरान इसके बड़े विदेशी मुद्रा भंडार ने मुद्रा की अस्थिरता को नियंत्रित करने तथा विश्वास को मजबूत करने में मदद की है। साख तय करने वाली वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने यह बात कही है।
मूडीज रेटिंग्स ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि उभरते देशों में भारत ‘बेहतर स्थिति’ में है और भविष्य में किसी भी तनाव के समय में देश मजबूत सुरक्षा बनाए रखेगा। स्पष्ट एवं भरोसेमंद मौद्रिक नीति रूपरेखा, मुद्रास्फीति अपेक्षाओं का स्थिर रहना और जरूरत पड़ने पर विनिमय दरों का समायोजित हो पाना, इन सभी कारणों से भारत भविष्य के झटकों से निपटने के लिए अच्छी स्थिति में है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास अपनी मुद्रा की अस्थिरता को रोकने के लिए पर्याप्त और विशाल विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि घरेलू वित्त पोषण पर भारत की निर्भरता स्थानीय बाजारों की मजबूती और बेहतर भंडार से संतुलित होती है। हालांकि, भारत का अपेक्षाकृत उच्च ऋण बोझ और कमजोर राजकोषीय संतुलन लगातार झटकों से निपटने के लिए उपलब्ध गुंजाइश को सीमित करता है। इसमें कहा गया कि हाल के दबाव से पहले ही भारत ने स्थिरता को समर्थन देने वाले महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए थे।
मूडीज ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अस्थिर वित्तीय परिस्थितियों में उनके वित्त पोषण लागत और बाजार पहुंच के आधार पर उनकी जुझारू क्षमता का आकलन किया। इसमें भारत, इंडोनेशिया, मेक्सिको, मलेशिया, थाईलैंड, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, तुर्किये और अर्जेंटीना जैसे बड़े उभरते बाजार देशों पर ध्यान केंद्रित किया गया। साथ ही दबाव के चार दौर का विश्लेषण किया गया।
इसके अलावा इनमें 2020 की शुरुआत में कोविड-19 वैश्विक महामारी की शुरुआत, 2022 में वैश्विक मुद्रास्फीति में उछाल और उससे जुड़ा अमेरिकी फेडरल रिजर्व का कड़ा मौद्रिक नीति रुख, 2023 की शुरुआत में अमेरिकी क्षेत्रीय बैंकिंग संकट और 2025 में नए सिरे से शुल्क दबाव शामिल हैं।
-------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर