मनोहर लाल ने बुनियादी ढांचे और विकास सहयोग पर महत्वपूर्ण बैठकें कीं, भूटान के सांस्कृतिक स्थलों का किया दौरा

 




- भूटान की पुनात्सांगछू-1 जलविद्युत परियोजना पर सात साल बाद फिर शुरू काम

नई दिल्ली, 11 अप्रैल (हि.स)। भूटान की 1,200 मेगावाट की पुनात्सांगछू-1 जलविद्युत परियोजना पर 7 साल के निलंबन के बाद फिर से काम शुरू हो गया है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने बांध निर्माण की शुरुआत के प्रतीक के रूप में आयोजित एक महत्वपूर्ण समारोह में शिरकत की।

विद्युत मंत्रालय ने शनिवार को जारी एक बयान में बताया कि भूटान यात्रा के तीसरे दिन ऊर्जा (बिजली) और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने खुरुथांग शहर का दौरा किया, जहां उन्होंने इस क्षेत्र में चल रही स्थानीय विकास पहलों और शहरी बुनियादी ढांचे की योजना के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने पुनाखा ज़ोंग का भी दौरा किया, जो भूटान के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक स्थलों में से एक है।

इसके बाद मनोहर लाल ने सिमतोखा जोंग का दौरा किया। माना जाता है कि यह भूटान के संस्थापक द्वारा 17वीं शताब्दी में बनवाया गया सबसे पुराना किला है, जहां उन्होंने मक्खन के दीये जलाने में हिस्सा लिया। मनोहर लाल ने बाद में भूटान की शाही सरकार में बुनियादी ढांचा और परिवहन मंत्री, ल्योनपो चंद्र बहादुर गुरुंग से मुलाकात की। चर्चाओं का मुख्य केंद्र बुनियादी ढांचे के विकास, शहरी सुविधाओं, कनेक्टिविटी और परिवहन प्रणालियों में द्विपक्षीय सहयोग के अवसर रहे।

मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार मनोहर लाल ने अपनी भूटान यात्रा के दौरान इस परियोजना स्थल का दौरा किया। भू-गर्भीय चुनौतियों के कारण 2019 से रुकी हुई इस परियोजना का पुनरुद्धार द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। इसके अगले पांच वर्षों के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। इस परियोजना का वित्तपोषित भारत ने किया है। यह परियोजना भारत-भूटान सहयोग की सबसे बड़ी संयुक्त जलविद्युत परियोजना है।

उल्लेखनीय है कि यह दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा संयुक्त जलविद्युत उपक्रम है। इसके पूरा होने पर भूटान की जलविद्युत क्षमता में काफी वृद्धि होगी। केंद्रीय मंत्री ने 10 अप्रैल को पुनात्सांगछू-1 में कंक्रीट डालने के समारोह में भाग लेकर बांध निर्माण फिर से शुरू होने का संकेत दिया। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि यह परियोजना भारत-भूटान के मजबूत ऊर्जा संबंधों को दर्शाती है। उन्होंने भारत के वित्तीय और तकनीकी सहयोग तथा निर्माण कार्य को सुरक्षित रूप से आगे बढ़ाने के संयुक्त प्रयासों पर जोर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर