स्टॉक मार्केट में एसके ऑफसेट की मामूली बढ़त के साथ एंट्री, फायदे में आईपीओ निवेशक
नई दिल्ली, 30 सितंबर (हि.स.)। फोल्डिंग कार्टन, लिथो लैमिनेटेड कार्बन और कॉरगेटेड बॉक्स का उत्पादन करने और ऑफसेट प्रिंटिंग, हाई क्वालिटी बुक प्रिंटिग तथा कमर्शियल प्रिंटिंग करने वाली कंपनी एसके ऑफसेट लिमिटेड के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में मामूली बढ़त के साथ कारोबार की शुरुआत की। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 125 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर इसकी लिस्टिंग 0.80 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 126 रुपये के स्तर पर हुई।
लिस्टिंग के बाद लिवाली के सपोर्ट से ये शेयर उछल कर 129 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में बिकवाली होने पर इसकी चाल में गिरावट भी आ गई। दोपहर 1:45 बजे तक का कारोबार होने के बाद ये शेयर 126 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहे थे। इस तरह अभी तक के कारोबार में कंपनी के आईपीओ निवेशक प्रति शेयर एक रुपये 0.80 प्रतिशत के फायदे में थे।
इस कंपनी का 29.06 करोड़ रुपये का आईपीओ 23 से 25 सितंबर, 2026 के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से फीका रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण यह ओवरऑल 1.17 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 1.73 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसी तरह नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन में 1.04 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसके अलावा रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 0.69 गुना ही सब्सक्राइब हो सका था।
इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 23.25 लाख नए शेयर जारी किए गए हैं। आईपीओ के जरिए जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी यूपी के मेरठ नया प्लांट और उसके लिए मशीनरी खरीदने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने, पुराने कर्ज के बोझ को हल्का करने, आईपीओ से जुड़े खर्चों की भरपाई करने और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।
एसके ऑफसेट की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 72 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 1.54 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी को 7.48 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था।
इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में इसे 23.31 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 48.65 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी को 67 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।
इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पर 14.70 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 32.35 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो इस दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ उछल कर 34.58 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।
इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में ये 4.58 करोड़ रुपये के स्तर पर था। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का नेटवर्थ बढ़ कर 7.20 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में ये 19.78 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
कंपनी के रिजर्व और सरप्लस की बात करें तो इस अवधि में कंपनी इस मोर्चे पर भी बढ़त हासिल करने में सफल रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में ये 3.58 करोड़ रुपये के स्तर पर था। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस बढ़ कर 5.95 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 14.36 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2023-24 में 1.16 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 5.62 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का ईबीआईटीडीए उछल कर 14.18 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक