आईबीसी के 10 साल पूरे, वित्त मंत्री ने कहा- इसने वित्तीय प्रणाली को मजबूत किया
- आईबीसी समाधान प्रक्रिया ने लेनदारों के लिए चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की वसूली को बनाया सुगम
नई दिल्ली, 28 मई (हि.स)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) ने भारत की वित्तीय प्रणाली को मज़बूत किया है और संकटग्रस्त व्यवसायों को तेज़ी से पटरी पर लाने में मदद की है। इस इन्सॉल्वेंसी कानून के लागू हुए 10 साल पूरे हो गए हैं।
कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने जारी एक बयान में बताया कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी), जो 2016 में लागू हुई थी, उसके आज 10 वर्ष पूरे हुए। लागू होने के एक दशक बाद, यह संहिता न केवल एक विधायी सुधार के रूप में उभरी है बल्कि एक ऐसे संस्थागत बदलाव के रूप में भी सामने आई है, जिसका दूरगामी प्रभाव ऋण बाजारों, कंपनियों के व्यवहार, निवेशकों के विश्वास और आर्थिक दक्षता पर पड़ा है।
मंत्रालय ने कहा कि एक ऐतिहासिक सुधार के रूप में सराहे गए, इस संहिता को देश के बिखरे दिवाला ढांचे को समेकित और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इसके कार्यान्वयन से वसूली तंत्र में सुधार हुआ है, इससे उधार लेने एवं देने की जिम्मेदार कार्यपद्धतियों को प्रोत्साहन मिला है, भारत की वित्तीय एवं कानूनी प्रणालियों में विश्वास मजबूत हुआ है।
कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने कहा कि इसका प्रमाण इस तथ्य से मिलता है कि मार्च 2026 तक 1,419 मामलों में समाधान योजनाएं तैयार की जा चुकी थीं। इस समाधान प्रक्रिया के जरिए लेनदारों को 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वसूली संभव हुई है। लेनदारों को प्राप्त यह वसूली क्रमशः उनके उचित मूल्य के 95 फीसदी और परिसमापन मूल्य के 167 फीसदी के बराबर है।
मंत्रालय के मुताबिक आज इस संहिता के इर्द-गिर्द विकसित हो रहे न्यायशास्त्र ने एक ऐसे मजबूत एवं गतिशील दिवाला इकोसिस्टम के विकास में पूरा योगदान दिया है, जो उभरती आर्थिक वास्तविकताओं और हितधारकों की अपेक्षाओं के अनुरूप ढलता रहता है। मार्च 2026 तक, कुल 8,987 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 7,102 मामलों का निपटारा हो चुका है। इन निपटाए गए सभी मामलों में से लगभग 58 फीसदी यानी 4,099 कंपनियों को सफलतापूर्वक बचाया गया जबकि 3,003 मामलों का परिसमापन कर दिया गया। जिन प्रतिष्ठानों को बचाया गया, उनमें से 1,388 मामले अपील, समीक्षा या समझौते के कारण बंद कर दिए गए; 1,292 मामले वापस ले लिए गए।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर