भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के तहत वस्तु के मूल स्रोत का पता लगाने को नियम अधिसूचित

 




नई दिल्ली, 04 जुलाई (हि.स)। वित्त मंत्रालय ने भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) के तहत सामान की उत्पत्ति का पता लगाने के नियम जारी किए हैं। ये नियम 15 जुलाई से लागू होंगे।

वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के जरिए इस संदर्भ में एक अधिसूचना जारी की गई है। सीबीआईसी ने यह नियम 03 जुलाई, 2026 की अधिसूचना संख्या 62/2026-कस्टम्स (एन.टी.) के जरिए अधिसूचित किए हैं। यह नियम 15 जुलाई, 2026 से लागू होंगे।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने जारी अधिसूचना में कहा कि दोनों देशों द्वारा अधिकृत संस्थानों को अपने-अपने देशों में ये प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति है। इसमें कहा गया है, ‘‘इन नियमों को सीमा शुल्क (भारत और यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन तथा उत्तरी आयरलैंड के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते के तहत वस्तु की उत्पत्ति का निर्धारण) नियम, 2026 कहा जा सकता है।

भागीदार देशों के साथ भारत के व्यापार समझौते के तहत शुल्क लाभ पाने के लिए निर्यात को लेकर ‘उत्पत्ति प्रमाणपत्र’ एक जरूरी दस्तावेज है। उत्पादों के मूल स्रोत का पता लगाना इसलिए जरूरी है ताकि कोई तीसरा देश दोनों देशों के बीच हुए व्यापार समझौते और शुल्क छूट का गलत फायदा न उठा सके।

सीईटीए ब्रिटेन को भारत के 99 फीसदी निर्यात के लिए शुल्क मुक्त पहुंच देता है। इससे कपड़ा, समुद्री उत्पाद, चमड़ा, फुटवियर, खेल के सामान, खिलौने और रत्न तथा आभूषण जैसे श्रम गहन उद्योगों के साथ-साथ इंजीनियरिंग के सामान, वाहन कल-पुर्जे और जैविक रसायन जैसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों के लिए नए मौके खुलेंगे।

उल्लेखनीय है कि भारत और ब्रिटेन के बीच वित्त वर्ष 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 8.62 फीसदी बढ़कर 25.12 अरब डॉलर रहा। इसमें निर्यात 13.44 अरब डॉलर, जबकि आयात 11.68 अरब डॉलर था। पिछले वित्त वर्ष में भारत का व्यापार अधिशेष 1.76 अरब डॉलर रहा।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर