भारत को स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा क्यों नहीं चाहिए, यह तथ्य भी हैं!

 


वादे और आरोप ज्यादा, ठोस निवेश और सुरक्षा समाधान कम

नई दिल्ली, 09 अक्टूबर (हि.स.)। स्पेसएक्स के सीईओ और दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क ने स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के जरिए भारत के उन क्षेत्रों की मदद करने की बात कही, जहां अभी तक इंटरनेट नहीं मिल पा रही है। मस्क ने साथ ही कहा, उनकी कंपनी को भारत में अमीर वर्ग के कारण नियामक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है और विरोध करने वालों पर सबसे गरीब लोगों को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी उन्होंने लगाया।

यहां ध्यान देनेवाला एक पक्ष यह भी है कि मस्क की यह टिप्पणियां तब आईं जब स्टारलिंक का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में इंडिया मोबाइल कांग्रेस में भाग ले रहा है, जबकि इससे जुड़ी हकीकत यही है कि भारत के लिए एलन मस्क अभी तक सिर्फ योजनाएं ही बनाते रहे हैं। टेस्ला को लेकर उन्होंने बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन स्थानीय उत्पादन में निवेश से पीछे हट गए। दरअसल, मस्क बार-बार भारत में निवेश और सेवा शुरू करने की बात करते रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में टेस्ला का कारखाना नहीं बना और स्टारलिंक अभी सुरक्षा मंजूरी के चरण में ही अटका है।

चीन में तेजी से निवेश, भारत में सिर्फ तारीखें

इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकातों और भारत यात्रा के बड़े-बड़े ऐलानों के बाद भी मस्क ने टेस्ला की जिम्मेदारियों का हवाला देकर भारतीय दौरा रद कर दिया, जबकि इसके ठीक बाद उन्होंने चीन का दौरा किया। चीन में मस्क का निवेश बहुत पहले हो चुका है। शंघाई गिगाफैक्ट्री का निर्माण जनवरी 2019 में शुरू हुआ और उसी साल के अंत तक उत्पादन चालू हो गया। आज वहां 400 से ज्यादा टियर-1 स्थानीय आपूर्तिकर्ता हैं और कंपोनेंट्स का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा स्थानीय स्तर पर बनता है।

चीन में मस्क ने तेजी से निवेश और उत्पादन किया, जबकि भारत में वादे और आरोप ज्यादा दिखे हैं। 2025-26 में टेस्ला ने भारत में शोरूम तो खोला, पर स्थानीय स्तर पर फैक्ट्री स्थापित करने की बात ठंडे बस्ते में डाल दी गई।

सुरक्षा पर मस्क की मंशा साफ नहीं

स्टारलिंक की भारत योजना भी इसी पैटर्न पर दिखती है। कंपनी को जून 2025 में जीएमपीसीएस लाइसेंस और जुलाई 2025 में इन-स्पेस की मंजूरी मिली लेकिन व्यावसायिक सेवा अभी शुरू नहीं हुई। सरकार की मुख्य चिंता सैटेलाइट नेटवर्क की सुरक्षा, डेटा पर नियंत्रण, वैध इंटरसेप्शन और आपात स्थिति में सेवा पर भारतीय नियंत्रण को लेकर है। स्टारलिंक के इंटर-सैटेलाइट लेजर लिंक ऐसे हैं कि ट्रैफिक भारतीय गेटवे को बायपास कर सकता है।

मणिपुर में इंटरनेट शटडाउन के दौरान स्टारलिंक उपकरण जब्त होने और ईरान संघर्ष में अनधिकृत टर्मिनलों के इस्तेमाल की रिपोर्टों ने ये आशंकाएं बढ़ाई हैं। मस्क सुरक्षा समाधान देने के बजाय भारत की नियामक व्यवस्था पर ही सवाल उठा रहे हैं।

अंबानी-राहुल गांधी विवाद और सरकार का रुख

मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह सवाल उठाकर विवाद खड़ा कर दिया कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं? इस पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी तंज कसा। हालांकि, भारत सरकार ने मस्क के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। दूरसंचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि देश में सैटेलाइट संचार समेत सभी टेलीकॉम सेवाओं के लिए निष्पक्ष व गैर-भेदभावपूर्ण नियमन ढांचा है।

सरकार ने स्टारलिंक, जियो सैटकाम और यूटेलसैट वनवेब- तीनों कंपनियों को लाइसेंस दिए हैं और तीनों इस समय सुरक्षा मूल्यांकन के एक ही चरण में हैं, लेकिन सभी को यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि बिना सुरक्षा मंजूरी के किसी को भी स्पेक्ट्रम नहीं मिलेगा।

भारत की आत्मनिर्भरता और जियो का विजन

भारत को मस्क की स्टारलिंक पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है क्योंकि रिलायंस समूह की कंपनी जियो ने भी सैटेलाइट संचार में उतरने की घोषणा कर दी है। कंपनी करीब 1,600 सैटेलाइट लॉन्च करने और भारत में 23 ग्राउंड स्टेशन तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। जियो का विजन डिजाइन, इंजीनियरिंग, इंटीग्रेशन और टेस्टिंग से लेकर लांच, डिप्लायमेंट व आपरेशन तक पूरी शृंखला का नियंत्रण भारत में रखने का है।

यानी सैटेलाइट मोबिलिटी में भारत को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना, ताकि उपयोगकर्ताओं और उनके डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। मस्क के इस दावे के विपरीत कि मई, 2026 तक भारत के 11,256 गांवों में 4जी कवरेज नहीं था, भारत सरकार अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की कीमत पर किसी भी विदेशी कंपनी को सीधे बाजार नहीं सौंप सकती। यही किसी राष्ट्र के लिए नीति होना चाहिए, जिसका कि पालन आज भारत सरकार पूरी ईमानदारी से करती हुई नजर भी आ रही है, इसलिए नेताप्रतिपक्ष राहुल गांधी फिर कुछ भी कहें, उनके कहने से सच नहीं बदलेगा।

विपक्ष में बैठकर बोलना आसान होता है, सच यही है कि यदि आज उनकी भी केंद्र में सरकार होती तो संभवत: वह भी वही निर्णय लेती जोकि इस वक्त मोदी सरकार इस मामले में ले रही है। भारतीय नागरिक के डेटा सुरक्षा की जानकारी सबसे पहले है, जिसको लेकर कोई आश्वासन अब तक एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने अब तक भारत सरकार को नहीं दिया है!

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी