एचडीएफसी बैंक ने पूर्व चेयरमैन के इस्तीफे में उठाए मुद्दों की जांच के लिए बाहरी कंपनी नियुक्त की
नई दिल्ली, 24 मार्च (हि.स)। देश के दूसरे सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक ने पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे में उठाए गए मुद्दों की स्वतंत्र जांच के लिए बाहरी विधि कंपनियों को नियुक्त किया है। बैंक ने यह कदम तथ्यों पर आधारित एवं निष्पक्ष आकलन सुनिश्चित करने के लिए उठाया है।
एचडीएफसी बैंक के प्रवक्ता ने मंगलवार को बताया कि बाहरी विधि कंपनियों की नियुक्ति एक सक्रिय कदम है, ताकि पत्र में उठाए गए सभी पहलुओं की स्वतंत्र रूप से समीक्षा की जा सके और वस्तुनिष्ठ एवं तथ्य आधारित मूल्यांकन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि यह कदम बैंक द्वारा दशकों से अपनाए जा रहे उच्चतम कॉरपोरेट कामकाज मानकों के अनुरूप लगातार समीक्षा एवं तुलना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
एचडीएफसी बैंक के अंशकालिक चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए अपना पद अचानक छोड़ दिया था। उनका इस्तीफा 18 मार्च से प्रभावी हो गया। यह पहली बार है, जब बैंक के किसी अंशकालिक चेयरमैन ने कार्यकाल के बीच में इस्तीफा दिया है, जिससे बैंक के कामकाज को लेकर सवाल खड़े हो गए। चक्रवर्ती को आर्थिक मामलों के सचिव के रूप में सेवानिवृत्ति के करीब एक साल बाद 5 मई, 2021 से अंशकालिक चेयरमैन नियुक्त किया गया था। उनका कार्यकाल 2024 में तीन और वर्ष के लिए बढ़ाकर 4 मई, 2027 तक कर दिया गया था। चक्रवर्ती 1985 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं।
वे अप्रैल 2020 में आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए। इससे पहले वह निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) के सचिव थे। ये दोनों विभाग वित्त मंत्रालय के तहत आते हैं। चक्रवर्ती बैंक की मूल कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड के साथ ‘रिवर्स मर्जर’ प्रक्रिया के दौरान चेयरमैन बने थे, जो देश की प्रमुख आवासीय वित्त कंपनी है।
एचडीएफसी लिमिटेड का एचडीएफसी बैंक में विलय 1 जुलाई, 2023 से प्रभावी हुआ, जिससे 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संयुक्त बही-खाते वाली एक विशाल वित्तीय इकाई का निर्माण हुआ। चक्रवर्ती ने 17 मार्च को लिखे अपने इस्तीफे में कहा था कि पिछले दो वर्ष में बैंक के भीतर मैंने कुछ ऐसी घटनाएं एवं कार्य प्रणालियां देखीं जो मेरे व्यक्तिगत मूल्यों व नैतिकता के अनुरूप नहीं हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर