यूपीआई एमडीआर पर जीएसटी लगाने के बारे में जीएसटी परिषद करेगी फैसला
नई
दिल्ली, 24 सितंबर (हि.स.)। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर लगने वाले मर्चेन्ट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के ऊपर जीएसटी लगाने के संबंध में फैसला करेगी। जीएसटीपरिषद की अगली बैठक 7 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को दी जानकारी में कहा कि सेवाओं पर जीएसटी लगता है, इस बारे में केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद करेगी, जिसमें राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होते हैं। सूत्रों ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि उपभोक्ताओं के व्यापक हित में जीएसटी परिषद यूपीआई लेनदेन पर व्यापारियों पर लगने वाले शुल्क पर 18 फीसदी जीएसटी दर लगाने पर विचार करेगी। क्योंकि बीमा प्रीमियम के मामले में ऐसा किया जा चुका है।’’
सूत्रों ने यह भी संकेत दिया कि अगली बैठक में परिषद का मुख्य जोर प्रक्रिया सुधार और उसे सरल बनाने पर रहेगा। जीएसटी कर दरों में बदलाव पर विचार नहीं किया जाएगा । पंद्रह अक्टूबर से लागू होने वाली एमडीआर व्यवस्था के तहत इसका भुगतान कारोबारी करेंगे। यह शुल्क भुगतान निपटान सेवाओं के लिए लिया जाएगा।
जानकारों का कहना है, चूंकि भुगतान नेटवर्क के जरिये डिजिटल भुगतान के लेनदेन के प्रसंस्करण और निपटान के लिए इस शुल्क का भुगतान कारोबारी करेंगे, इसलिए जीएसटी कानून के तहत यह सेवा की श्रेणी में आएगा और इस पर 18 फीसदी जीएसटी लगेगा।
कर विशेषज्ञों के अनुसार इससे कारोबारियों पर पड़ने वाला कुल कर बोझ कुछ कम हो सकता है। हालांकि, कारोबारी एमडीआर पर भुगतान किए गए जीएसटी का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) ले सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने 15 अक्टूबर से कारोबारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 फीसदी एमडीआर लागू किया है। वहीं, 75 हजार रुपये या इससे अधिक के भुगतान पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये होगा। लेकिन,
व्यक्ति-से-व्यक्ति के लेनदेन और छोटे भुगतान को इस शुल्क से बाहर रखा गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर