केंद्र सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्रों के लिए बढ़ाए एकमुश्त विशेष राहत उपाय

 


नई दिल्ली, 01 अप्रैल (हि.स)। केंद्र सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) के लिए कुछ शुल्क लाभों के रूप में एकमुश्त विशेष राहत उपाय की घोषणा की है। सरकार ने यह कदम वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इन क्षेत्रों में स्थित इकाइयों को सहारा देने के उद्देश्य से उठाया है, जो आज से प्रभावी हो गया है।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित वैश्विक व्यापार व्यवधानों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्रों में पात्र इकाइयों को घरेलू टैरिफ क्षेत्र में रियायती सीमा शुल्क दरों पर निर्मित वस्तुओं की बिक्री के लिए एकमुश्त राहत उपाय पेश किया है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक केंद्रीय बजट की घोषणा को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 25 के तहत जारी छूट अधिसूचना के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जो विशेष आर्थिक इकाइयों द्वारा घरेलू टैरिफ क्षेत्र को भेजे गए निर्मित माल पर लागू होगी। यह 1 अप्रैल से 31 मार्च, 2027 तक प्रभावी रहेगी।

वित्त मंत्रालय के मताबिक यह छूट केवल उन्हीं इकाइयों को मिलेगी, जिन्होंने 31 मार्च 2025 या उससे पहले वस्तुओं का उत्पादन शुरू कर दिया था।इस राहत योजना के अंतर्गत पात्र विशेष आर्थिक इकाइयों के लिए रियायती दरों का निर्धारण करते समय घरेलू टैरिफ क्षेत्र में कार्यरत इकाइयों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने का पूरा ध्यान रखा गया है। घरेलू उद्योग की सुरक्षा के लिए कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है। घरेलू टैरिफ क्षेत्र बिक्री पिछले तीन वित्तीय वर्षों में से किसी भी वित्तीय वर्ष में पिछले उच्चतम निर्यात प्रदर्शन के 30 फीसदी तक सीमित है।

दरअसल, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए एक एकमुश्त विशेष उपाय का प्रस्ताव किया था, ताकि एसईजेड की पात्र विनिर्माण इकाइयों को घरेलू शुल्क क्षेत्र (डीटीए) में रियायती शुल्क दरों पर बिक्री करने की सुविधा मिल सके। यह प्रस्ताव वैश्विक व्यापार में व्यवधान के कारण एसईजेड की विनिर्माण इकाइयों की क्षमता उपयोग से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए लाया गया था। उन्होंने कहा था कि ऐसी बिक्री की मात्रा उनके निर्यात के एक निर्धारित अनुपात तक सीमित रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर