केंद्र ने केवल निर्यात के लिए भंडार-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में एफडीआई की अनुमति दी
नई दिल्ली, 23 जुलाई (हि.स.)। केंद्र सरकार ने निर्यात के लिए ई-कॉमर्स इन्वेंट्री मॉडल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दे दी है। इससे विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियां अब भारत में अपना स्टॉक को रखकर विदेशों में सामान बेच सकेंगी।
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने गुरुवार को जारी एक अधिसूचना में कहा कि केंद्र सरकार ने केवल निर्यात उद्देश्यों के लिए भंडारण-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अपनी अनुमति दे दी है। सरकार के इस कदम से छोटे खुदरा कारोबारियों के कारोबार पर असर डाले बिना भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
डीपीआईआईटी ने जारी अधिसूचना में कहा, ‘‘भारतीय विक्रेताओं को वैश्विक बाजारों तक आसान और व्यापक पहुंच उपलब्ध कराकर निर्यात बढ़ाने के उद्देश्य से मौजूदा एफडीआई नीति की समीक्षा की गई है। इसके तहत ये निर्णय लिया गया है कि देश में निर्मित और/या उत्पादित वस्तुओं एवं उत्पादों के निर्यात के मामले में माल भंडार-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल पर लागू प्रतिबंध लागू नहीं होंगे।’’
अधिसूचना के मुताबिक समेकित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति के अनुसार व्यापार-से-व्यापार (बी2बी) ई-कॉमर्स और मार्केटप्लेस मॉडल में केवल एफडीआई की अनुमति है। हालांकि, कंपनी-से-उपभोक्ता (बी2सी) मॉडल में हालांकि ई-कॉमर्स और भंडारण-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में एफडीआई की अनुमति नहीं है। इस मॉडल में वस्तुओं और सेवाओं का भंडार ई-कॉमर्स इकाई के स्वामित्व में होता है और वह उन्हें सीधे उपभोक्ताओं को बेचती है।
डीपीआईआईटी ने जारी अपनी नीति में एक नया प्रावधान जोड़ा है जिसके अनुसार, ‘‘ई-कॉमर्स इकाई को विदेश व्यापार नीति, 2023 और विदेशी मुद्रा प्रबंधन (वस्तुओं एवं सेवाओं का निर्यात) विनियम, 2015 के लागू प्रावधानों के अनुरूप भारत में विनिर्मित और/या उत्पादित वस्तुओं एवं उत्पादों के केवल निर्यात के लिए माल भंडार-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल अपनाने की अनुमति होगी।’’
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर