केंद्र ने चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए उठाए सख्त कदम

 


- कहा, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार मानना गलत

नई दिल्ली, 21 अगस्त (हि.स.)। केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और त्योहारी सीजन में इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। केंद्र ने चीनी भंडारण की सीमा को कड़ी करने के साथ-साथ शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है।

केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण लगाने के लिए चीनी के भंडार की सीमा कड़ी की गई है। इसके साथ ही शुल्क-मुक्त चीनी के आयात की अनुमति दी गई है। सरकार ने एक दिन पहले 31 अक्टूबर तक बिना किसी ड्यूटी के 10 लाख मीट्रिक टन तक कच्ची चीनी के आयात की मंजूरी दी थी। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथनॉल को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह इथेनॉल नहीं है। असल में इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा वित्त वर्ष 2022-23 में लगभग 12 फीसदी से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 9 फीसदी हो गया है।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कहा कि देश में बनने वाले इथेनॉल का तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्के से आता है। मंत्रालय ने कहा कि हाल के हफ्तों में चीनी की कीमतें बढ़ी हैं। मंत्रालय के मुताबिक 20 जुलाई को चीनी की कीमत 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थीं, जो 20 अगस्त को बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो ग्राम हो गईं है। मंत्रालय ने बताया कि सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और उसने यह सुनिश्चित करने के लिए कई महत्पूर्ण कदम उठाए हैं, ताकि उपभोक्ताओं को त्योहारी सीजन में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और कीमतें स्थिर रहें।

केंद्र सरकार ने एक दिन पहले त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतें नियंत्रित रखने और जमाखोरी रोकने के लिए बड़े और थोक उपभोक्ताओं (जो प्रति माह 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग करते हैं) के लिए स्टॉक सीमा 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी है। यह नया नियम 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर