घरेलू बाजार में ग्लोबल फंड्स की ताबड़तोड़ बिकवाली, तीन महीने में बेचे 18.84 अरब डॉलर के शेयर

 


- घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 31 अरब डॉलर की लिवाली कर बाजार को दिया सहारा

नई दिल्ली, 11 अप्रैल (हि.स.)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ग्लोबल फंड्स घरेलू शेयर बाजार में शुद्ध बिकवाल (सेलर) की भूमिका में बने हुए नजर आ रहे हैं। शेयर बाजार में ग्लोबल फंड्स द्वारा लगातार बिकवाली की जा रही है। साल 2026 के पहले तीन महीने में ही इन विदेशी फंड्स ने इंडियन इक्विटी मार्केट में 18.84 अरब डॉलर की रिकॉर्डतोड़ बिकवाली की है। मार्चे खत्म होने के बाद सिर्फ अप्रैल के शुरुआती दस दिन में ही ग्लोबल फंड्स ने तीन अरब डॉलर की बिकवाली की है।

माना जा रहा है कि जियो पॉलिटिकल टेंशन और कच्चे तेल की कीमत में जोरदार तेजी की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ने की आशंका की वजह से ग्लोबल फंड्स भारतीय बाजार में बिकवाली कर अपना पैसा सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उन्हें और उनके निवेशकों को बड़े नुकसान का सामना न करना पड़े।

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (सीडीएसएल) द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार साल 2026 में ग्लोबल फंड्स ने भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली करने के सभी आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है। इस साल के पहले तीन महीने के दौरान विदेशी फंड्स ने इक्विटी मार्केट में बिकवाली कर 18.84 अरब डॉलर की निकासी की है, जबकि साल 2025 में ग्लोबल फंड्स ने इंडियन इक्विटी मार्केट में कुल 18.79 अरब डॉलर की बिकवाली की थी। मतलब पिछले साल 12 महीने की अवधि में ग्लोबल फंड्स ने इक्विटी मार्केट में जितनी बिकवाली की थी, उससे अधिक बिकवाली उन्होंने इस साल के पहले तीन महीने में ही कर ली है।

राहत की बात यही है कि पश्चिम एशिया संकट और पहले से ही दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी जारी तनाव के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (म्यूचुअल फंड हाउस और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस) लगातार खरीदारी कर घरेलू बाजार को सहारा दे रहे हैं। इन तनाव के बीच जहां विदेशी निवेशक ओर ग्लोबल फंड्स भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक ने घरेलू बाजार में जम कर निवेश किया है। इस साल घरेलू संस्थागत निवेशक शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों और ग्लोबल फंड्स की बिकवाली से काफी अधिक यानी 31 अरब डॉलर का निवेश कर चुके हैं।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्लोबल फंड्स की लगातार बिकवाली के कारण घरेलू शेयर बाजार पर दबाव लगातार बना हुआ है। इस सप्ताह पश्चिम एशिया में अगले दो सप्ताह के लिए अस्थायी सीजफायर का ऐलान होने के बाद मार्केट सेंटिमेंट्स मामूली सुधार जरूर हुआ है, लेकिन बिकवाली का दबाव खत्म नहीं हुआ है। रिकॉर्ड हाई लेवल से बाजार काफी नीचे गिर चुका है, जिससे निवेशकों को डेढ़ साल से भी कम अवधि में करीब 600 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।

धामी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और कंपनियों की कमजोर अर्निंग्स ग्रोथ के कारण भी घरेलू शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी कम हुई है। भारतीय कंपनियों के कई बड़े शेयर भी तनाव के मौजूदा माहौल में अपना आकर्षण खोने लगे हैं। इसके साथ ही कंपनियो के अर्निंग में भी साइक्लिकल स्लोडाउन दिख रहा है।

इसके अलावा रुपये में कमजोरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ने वाले असर ने भी भारतीय बाजार का आकर्षण कम किया है। यही वजह से ग्लोबल फंड्स की ओर से भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली की जा रही है। हालांकि, वैश्विक दबाव की स्थिति मे विदेशी फंड्स द्वारा की जा रही बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों ने आक्रामक अंदाज में खरीदारी कर बाजार को पूरी तरह से ध्वस्त होने से बचा लिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक