वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 7 से 7.4 फीसदी रहने का अनुमान : सीईए
नई दिल्ली, 27 फरवरी (हि.स)। नई सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) शृंखला में अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 0.20 फीसदी बढ़ाकर 7 से 7.4 फीसदी कर दिया गया है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 7.1 फीसदी से अधिक है।
देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने शुक्रवार को नई जीडीपी शृंखला जारी होने के मौके पर आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए यह बात कही।
नागेश्वरन ने कहा, “हम वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान पहले के 6.8-7.2 फीसदी से बढ़ाकर 7.0-7.4 फीसदी कर रहे हैं।हालांकि अर्थव्यवस्था के सात फीसदी के बजाय 7.4 फीसदी के करीब बढ़ने की अधिक संभावना है।”
नागेश्वरन ने कहा कि नई शृंखला में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 7-7.4 फीसदी किया गया है। जनवरी में संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में अगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर 6.8-7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने वार्षिक और तिमाही राष्ट्रीय लेखा अनुमान की नई शृंखला जारी की है, जिसका आधार वर्ष 2022-23 रखा गया है। इससे पहले आधार वर्ष 2011-12 था। नई राष्ट्रीय आय शृंखला के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष के 7.1 फीसदी से अधिक है।
नागेश्वरन ने कहा कि मौजूदा आर्थिक संकेतकों के आधार पर मौजूदा कीमतों पर जीडीपी की वृद्धि दर करीब 11 फीसदी रह सकती है, जबकि अर्थव्यवस्था का आकार 4,000 अरब डॉलर के स्तर को आसानी से पार कर जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था व्यापक आधार वाली गतिविधियों के समर्थन से मजबूत वृद्धि की रफ्तार बनाए हुए है।
दरअसल आधार वर्ष बदलने का उद्देश्य अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना और गतिविधियों को अधिक सटीक रूप से दर्शाना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर