ईपीएफओ ने विवादों के सौहार्दपूर्ण निपटारे के लिए 'विश्वास-2026' पहल शुरू की
नई दिल्ली, 17 जुलाई (हि.स.)। केंद्र सरकार ने 'विश्वास-2026' नामक एकमुश्त विवाद समाधान पहल की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य विवादों का सौहार्दपूर्ण निपटारा करना है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की यह योजना 29 जून को अधिसूचित की गई है, जो 29 जून से प्रभावी हो गई है। यह अधिसूचना की तिथि से छह महीने की अवधि तक परिचालन में रहेगी।
श्रम मंत्रालय के मुताबिक विश्वास-2026 योजना के तहत 14 जून, 2024 से पहले की अवधि से संबंधित चूकों के लिए क्षतिपूर्ति/जुर्माने की गणना काफी कम दरों पर की जाएगी। इसमें दो महीने तक की चूकों के लिए 0.25 फीसदी प्रति माह, दो से चार महीने से कम की चूकों के लिए 0.50 फीसदी प्रति माह और 4 महीने से अधिक की चूकों के लिए 1.00 फीसदी प्रति माह रखा गया है। इन रियायती दरों का उद्देश्य नियोक्ताओं को लंबित विवादों को शीघ्रता से हल करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए, नियोक्ताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि ईपीएफ एवं एमपी अधिनियम, 1952 की धारा 7क्यू या सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 127 के तहत देय संपूर्ण ब्याज का भुगतान आवेदन जमा करने से पहले ही कर दिया गया हो। आवेदकों को ये वचन भी देना होगा कि योजना के तहत निपटाए गए विवाद के संबंध में आगे कोई अपील नहीं की जाएगी।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के मुताबिक इस योजना में हर्जाने या जुर्माने के रूप में पहले से भुगतान की गई राशि के समायोजन, अपील दाखिल करने के लिए किए गए वैधानिक पूर्व-जमा के नियमन और लंबित मामलों के निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से निपटान से संबंधित विस्तृत प्रावधान शामिल हैं। हालांकि, जिन प्रतिष्ठानों में जुर्माना /हर्जाना पूरी तरह से वसूल किया जा चुका है, धोखाधड़ी, गबन या अभिलेखों में जानबूझकर हेराफेरी से जुड़े मामले और ऐसे मामले जिनमें लागू वैधानिक ब्याज पूरी तरह से जमा नहीं किया गया है, उन्हें इस योजना से बाहर रखा गया है।
उल्लेखनीय है कि विश्वास, 2026 योजना के तहत आवेदन ईपीएफओ नियोक्ता पोर्टल के माध्यम से डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (डीएससी) या ई-हस्ताक्षर का उपयोग करके ऑनलाइन जमा किए जाएंगे। यह प्रक्रिया आवेदन दाखिल करने में आसानी, ऑनलाइन सत्यापन, डिजिटल प्रसंस्करण और निर्धारित समय सीमा के भीतर निपटान आदेश जारी करने को सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर