जीआई उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए एमएसएमई मंत्रालय का डीपीआईआईटी से करार
नई दिल्ली, 11 अगस्त (हि.स.)। सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने देश की भारतीय भौगोलिक संकेतक (जीआई) उत्पादों के व्यावसायिक प्रोत्साहन और बाजार तक पहुंच बढ़ाने के लिए एक समझौता किया है।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि भारत की भौगोलिक संकेत (जीआई) उत्पादों की समृद्ध विरासत की आर्थिक क्षमता को उजागर करने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के साथ 5 अगस्त को वाणिज्य भवन में यह समझौता किया गया है। समझौता ज्ञापन पर एमएसएमई मंत्रालय के निदेशक मोहम्मद सालिक परवेज और डीपीआईआईटी के आईपीआर प्रभाग के निदेशक करण थापर ने हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य देश के कारीगरों, बुनकरों और उत्पादकों की आजीविका को मजबूत करने के साथ ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) व्यवस्था को बढ़ावा देना है। साथ ही दोनों संगठन अपने कार्यक्रमों एवं योजनाओं में ओडीओपी को शामिल करने की दिशा में काम करेंगे।
भारत में भौगोलिक संकेत (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत भौगोलिक संकेतों के पंजीकरण एवं कानूनी संरक्षण के लिए डीपीआईआईटी नोडल विभाग है, जबकि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय देश भर में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, पारंपरिक उद्योगों और कारीगरों के विकास, वित्तीय सुदृढ़ता तथा समग्र उन्नति को बढ़ावा देने वाला नोडल मंत्रालय है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर