पश्चिम एशिया में सीजफायर खत्म होने का ऐलान होने से कच्चे तेल की कीमत में लगी आग
नई दिल्ली, 08 जुलाई (हि.स.)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ सीजफायर खत्म करने का ऐलान करने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में एक बार फिर जोरदार तेजी का रुख बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के ऐलान के बाद आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 6.6 प्रतिशत से भी ज्यादा उछल गया। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड ने भी 6.9 प्रतिशत तक की छलांग लगाई।
होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते गुजरने वाले कमर्शियल जहाज पर हुए हमले के बाद बने डर के माहौल में आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ने 2.02 डॉलर प्रति बैरल की मजबूती के साथ 76.18 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार की शुरुआत की। कारोबार की शुरुआत होने के बाद कुछ देर के लिए ब्रेंट क्रूड गिर कर 75.52 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचा लेकिन इसके बाद इसके भाव में तेजी आ गई।
दिन के कारोबार के बीच ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर को लेकर दिए बयान की वजह से कच्चे तेल की कीमत में अचानक जोरदार तेजी का रुख बन गया। भारतीय समय के मुताबिक दोपहर दो बजे के करीब ब्रेंट क्रूड 6.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 79.08 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि इसके बाद इसकी कीमत में थोड़ी गिरावट भी आई। भारतीय समय के मुताबिक शाम छह बजे ब्रेंट क्रूड 3.09 डॉलर प्रति बैरल यानी 4.17 प्रतिशत की तेजी के साथ 77.25 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड ने आज 1.98 डॉलर प्रति बैरल यानी 2.81 प्रतिशत उछलकर 72.42 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। थोड़ी देर में ही यह 6.90 प्रतिशत उछल कर 75.30 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। बाद में इसकी कीमत में भी थोड़ी गिरावट आई। भारतीय समय के मुताबिक शाम छह बजे डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.96 डॉलर प्रति बैरल यानी 4.21 प्रतिशत की मजबूती के साथ 73.40 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
क्रूड ऑयल की स्पॉट प्राइस बढ़ने के साथ फ्यूचर ट्रेडिंग में भी कच्चे तेल की कीमत में तेजी का रुख बना हुआ है। अगस्त डिलीवरी के लिए डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.1 प्रतिशत उछल कर 71.87 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। इसी तरह सितंबर डिलीवरी के लिए ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.9 प्रतिशत की छलांग लगा कर 75.53 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है।
पश्चिम एशिया में युद्ध की शुरुआत होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से उछल कर 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गई थी। हालांकि अमेरिका और ईरान दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत शुरू होने और सीजफायर का ऐलान होने के बाद कच्चे तेल की कीमत में गिरावट भी आई।
युद्ध रोकने के लिए की जा रही कोशिश के कारण कच्चा तेल एक बार फिर युद्ध शुरू होने के पहले के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि होर्मुज स्ट्रेट में एक बार फिर जहाज पर हमला होने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सीजफायर खत्म होने की बात कहने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में तेजी आने की आशंका बन गई है।
जानकारों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी हुई तो भारत जैसे तेल आयातक देशों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। खासकर, भारत के इंपोर्ट बिल में जबरदस्त उछाल आ सकता है। टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट को बढ़ा सकती है। इसके साथ ही इसकी वजह से फिस्कल डेफिसिट टारगेट भी हिट हो सकता है।
वैष्णव का कहना है कि करंट अकाउंट डेफिसिट और फिस्कल डेफिसिट के अलावा कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत भारतीय मुद्रा को कमजोर कर सकती है, महंगाई को बढ़ा सकती है। साथ ही फॉरेन कैपिटल आउटफ्लो (विदेशी पूंजी की निकासी) को और बढ़ा सकती है। इसी तरह अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव से स्टॉक मार्केट में अनिश्चितता की स्थिति बन सकती है, क्योंकि सरकार को सब्सिडी, इंटरेस्ट रेट और रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट पर पड़ने वाले असर के बारे में कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक