अंतरराष्ट्रीय बाजार में 115 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड, डब्ल्यूटीआई क्रूड ने भी पार किया 104 डॉलर का स्तर

 




नई दिल्ली, 29 अप्रैल (हि.स.)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकाबंदी बढ़ने की खबर की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमत में कोई राहत के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। ब्रेंट क्रूड आज 115 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी आज उछल कर 104 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया।

आज ब्रेंट क्रूड ने मंगलवार की क्लोजिंग की तुलना में 0.64 डॉलर की मामूली गिरावट के साथ 110.62 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। दिन के कारोबार में इसकी कीमत में लगातार तेजी का रुख बना रहा, जिसकी वजह से भारतीय समय के मुताबिक शाम पांच बजे ब्रेंट क्रूड उछल कर 115.61 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। कुछ देर बाद इसकी चाल में मामूली गिरावट भी आई। भारतीय समय के अनुसार शाम छह बजे तक का कारोबार होने के बाद ब्रेंट क्रूड 4.23 डॉलर यानी 3.80 प्रतिशत की तेजी के साथ 115.49 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

इसी तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड ने आज 0.70 डॉलर की कमजोरी के साथ 99.23 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। ओपनिंग के तुरंत बाद ये गिर कर थोड़ी देर के लिए 98.42 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आया लेकिन इसके बाद इसकी चाल में तेजी आ गई। दिन के कारोबार में तेजी की वजह से भारतीय समय के मुताबिक शाम पांच बजे तक डब्ल्यूटीआई क्रूड छलांग लगा कर 104.32 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में इसके भाव में मामूली गिरावट दर्ज की गई। भारतीय समय के अनुसार शाम छह बजे डब्ल्यूटीआई क्रूड 4.16 डॉलर यानी 4.17 प्रतिशत की तेजी के साथ 104.09 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

फ्यूचर मार्केट में भी कच्चे तेल की कीमत में आज लगातार तेजी का रुख बना रहा। जून के लिए ब्रेंट फ्यूचर्स 3.03 डॉलर यानी 2.8 प्रतिशत बढ़ कर 111.26 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बंद हुआ। ब्रेंट फ्यूचर्स की कीमत में लगातार सातवें दिन बढ़त दर्ज की गई है। इसी तरह जून के लिए वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) फ्यूचर्स भी 3.56 डॉलर यानी 3.70 प्रतिशत की उछाल के साथ 99.93 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर सेटल हुआ।

जानकारों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता शुरू होने में हो रही देरी और होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकाबंदी को और बढ़ाए जाने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में उछाल ला दिया है। बताया जा रहा है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट में अपनी नाकाबंदी को और बढ़ाने की योजना पर विचार कर रहा है। ऐसा होने पर होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल की सप्लाई नहीं हो पाएगी, जिससे भारत सहित दुनिया के कई देशों को कच्चे तेल की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इस डर की वजह से कच्चे तेल की कीमत में तेजी का रुख बना हुआ है।

फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया में शुरू हुई इस जंग ने दुनिया के पेट्रोलियम बेस्ड एनर्जी मार्केट को हिला कर रख दिया है। इस जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट के लगभग बंद हो जाने से फारस की खाड़ी से होने वाली ऑयल और गैस की सप्लाई में जबरदस्त गिरावट आई है। अमेरीका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए यहां नाकेबंदी कर रखी है। दूसरी ओर, ईरान अपनी ओर से होर्मुज को इंटरनेशनल ट्रैफिक के लिए बंद रखने की कोशिश में जुटा हुआ है।

पूरी दुनिया में होने वाली कच्चे तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा हॉर्मुज स्ट्रेट के जरिये होता है लेकिन पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण इसके लगभग ठप पड़ जाने से दुनिया भर में उथल-पुथल मच गई है और कच्चे तेल की कीमत में जबरदस्त उछाल आ गया। अमेरिका और इजरायल तथा ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से अभी तक कच्चे तेल की कीमत में 55 से 60 प्रतिशत की तेजी आ चुकी है।

कच्चे तेल की कीमत में आई तेजी भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकती है। जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट को बढ़ा सकती है। इसके साथ ही इसकी वजह से फिस्कल डेफिसिट टारगेट भी हिट हो सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत भारतीय मुद्रा को कमजोर कर सकती है, महंगाई को बढ़ा सकती है और फॉरेन कैपिटल आउटफ्लो (विदेशी पूंजी की निकासी) को और तेज कर सकती है।

इसी तरह अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव से स्टॉक मार्केट में अनिश्चितता आ सकती है क्योंकि सरकार को सब्सिडी, इंटरेस्ट रेट और रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट पर पड़ने वाले असर के बारे में कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमत ने सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए भी परेशानी खड़ी कर दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में बेतहाशा तेजी आने के बावजूद भारत में सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने नॉर्मल पेट्रोल और डीजल की कीमत नहीं बढ़ाई है। इससे इन कंपनियों का संचित नुकसान लगातार बढ़ता जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक