उपभोक्ता कार्य विभाग का पूर्वी राज्यों में उपभोक्ता न्याय में तेजी लाने के लिए डिजिटल सुधारों पर जोर

 




नई दिल्‍ली, 13 जनवरी (हि.स)। उपभोक्ता कार्य विभाग ने पूर्वी राज्यों में उपभोक्ता न्याय में तेजी लाने के लिए डिजिटल सुधारों पर जोर दिया है। विभाग ने लंबित मामलों को कम करने, आदेशों के अनुपालन में सुधार लाने और अनियमित प्रक्रियाओं से निपटने के लिए पटना में एक क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।

उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने मंगलवार को जारी एक बयान में बताया कि भारत सरकार के उपभोक्ता कार्य विभाग ने बिहार के पटना में पूर्वी राज्यों के लिए उपभोक्ता संरक्षण पर आज क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाया गया, ताकि उपभोक्ता शिकायत निवारण को मजबूत किया जा सके और उपभोक्ता आयोगों के कामकाज में सुधार किया जा सके।

मंत्रालय के अनुसार इस कार्यशाला में लंबित मामलों को कम करने, उपभोक्ता आयोग के आदेशों के अनुपालन में सुधार करने, त्वरित न्याय के लिए डिजिटल उपकरणों का उपयोग करने और डिजिटल बाजार में उभरते हुए खतरों जैसे कि अस्पष्ट पैटर्न और व्यापार के अनुचित प्रचलनों से निपटने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके अलावा पटना में आयोजित कार्यशाला में ई-जागृति, एनसीएच 2.0 और मामलों के त्वरित निपटान पर विशेष ध्यान दिया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारियों, उपभोक्ता आयोगों और राज्यों ने त्वरित न्याय तथा डिजिटल बाजारों पर विचार-विमर्श किया।

डिजिटल उपभोक्ता न्याय के लिए जोरदार प्रयास

इस अवसर पर उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने अपने संबोधन में देशभर में उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए विभाग द्वारा किए गए प्रमुख सुधारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच 2.0) की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया, जो मुकदमेबाजी से पहले एक ऐसा मंच है जो बहुभाषी पहुंच, ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने और प्रौद्योगिकी के माध्यम से त्वरित समाधान प्रदान करता है।

सचिव ने ई-जागरूकता के राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन का भी विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने कहा कि ई-जागृति खंडित प्रणालियों से एक पारदर्शी, कुशल और तत्क्षण डिजिटल इको-सिस्टम की ओर बदलाव का प्रतीक है, जिससे मामलों की बेहतर निगरानी और त्वरित निपटान संभव हो सकेगा। पूर्वी भारत के लिए इसके महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म बिहार, झारखंड और ओडिशा के ग्रामीण और भौगोलिक रूप से दूरदराज के जिलों में उपभोक्ता न्याय तक पहुंच में काफी सुधार ला सकते हैं। उन्होंने राज्य और जिला उपभोक्ता आयोगों से वीडियो सुनवाई, स्वचालित केस टूल और प्रदर्शन डैशबोर्ड का पूरा उपयोग करने का आग्रह किया, ताकि देरी को कम किया जा सके और आदेशों का समय पर निष्पादन सुनिश्चित किया जा सके।

कृषि और मूल्य स्थिरता पर जोर

निधि खरे ने दालों के घरेलू उत्पादन और खरीद को मजबूत करने की आवश्यकता के बारे में बताया और घरेलू खपत में अनाज से दालों की ओर बदलाव के बारे में भी चर्चा की। बिहार के मजबूत कृषि आधार का हवाला देते हुए, उन्होंने दालों की खेती के विस्तार और दलहन सहित सुव्यवस्थित खरीद की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों से अरहर, चना और उड़द जैसी दालें आयात करता है और घरेलू क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। सचिव ने बाजार मूल्य में गिरावट आने पर एमएसपी आधारित खरीद के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया, साथ ही यह सुनिश्चित किया कि किसानों को उपलब्ध उच्च बाजार मूल्यों से लाभ मिल सके, जिससे किसान कल्याण और खाद्य सुरक्षा को समर्थन मिले।

बिहार ने डिजिटल शासन सुधारों का स्वागत किया

उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने डिजिटल पहलों पर जोर दिए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि भविष्य के लिए तैयार शासन के लिए ऐसे सुधार आवश्यक हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नागरिकों को केवल लाभार्थी ही नहीं, बल्कि स्पष्ट जानकारी, निष्पक्ष व्यवहार और समय पर निवारण के अधिकार वाले उपभोक्ता के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने ई-जागृति जैसी पहलों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि डार्क पैटर्न जैसे उभरते मुद्दों पर चर्चा से सार्थक परिणाम निकलेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि कार्यशाला की सिफारिशों को बिहार सरकार द्वारा लागू किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी विभाग 2047 तक विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप काम कर रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर