केंद्र ने दक्षिणी राज्यों से विधिक माप में जन विश्वास सुधारों को तेजी से लागू करने को कहा

 


नई दिल्ली, 28 मई (हि.स)। केंद्र सरकार ने दक्षिणी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2026 के माध्यम से विधिक माप अधिनियम, 2009 के तहत शुरू किए गए सुधारों को जल्द से जल्द लागू करें।

उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और तेलंगाना सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ हाल में हुई एक समीक्षा बैठक में केंद्र ने जन विश्वास सुधारों को तेजी से लागू करने पर जोर दिया।

मंत्रालय ने बताया कि इस बैठक में पंजीकरण आधारित ढांचे, जीएटीसी विस्तार और ई-एमएएपी एकीकरण की समीक्षा की गई। सरलीकृत अनुपालन और मजबूत उपभोक्ता सुरक्षा उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया। मंत्रालय ने कहा, ‘‘इन सुधारों का उद्देश्य एक पारदर्शी, आधुनिक और संतुलित नियामकीय पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है, जो कारोबार सुगमता और उपभोक्ता संरक्षण, दोनों को बढ़ावा दे।’’

उपभोक्ता मामले के मंत्रालय ने कहा कि चर्चा के दौरान, राज्यों से अनुरोध किया गया कि वे यह सुनिश्चित करें कि ‘‘लाइसेंसिंग’’ से ‘‘पंजीकरण’’ की ओर होने वाला बदलाव वास्तव में एक विश्वास-आधारित और सहायक नियामक प्रणाली को दर्शाता हो। वहीं, इस बात पर जोर दिया गया कि निर्धारित दस्तावेज जमा करने पर बिना किसी अनावश्यक देरी या पहले से किए जाने वाले निरीक्षण के पंजीकरण अपने आप मिल जाना चाहिए।’’

मंत्रालय ने जन विश्वास सुधारों के तहत हाल ही में शुरू की गई ‘सुधार नोटिस’ व्यवस्था के कार्यान्वयन की भी समीक्षा की। इस प्रावधान के तहत, विधिक माप अधिनियम की विशिष्ट धाराओं के तहत पहली बार होने वाले प्रक्रियात्मक उल्लंघनों पर, कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से पहले एक ‘सुधार नोटिस’ जारी किया जाएगा। इस सुधार का उद्देश्य स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करना, मुकदमों को कम करना और उपभोक्ता हितों की रक्षा करते हुए कारोबार सुगमता को बेहतर बनाना है।

सरकारी-अनुमोदित परीक्षण केंद्रों (जीएटीसी) के विस्तार के संबंध में, मंत्रालय ने कहा कि राज्यों से अनुरोध किया गया है कि वे संशोधित विधिक माप ढांचे के अनुरूप अपने प्रवर्तन नियमों और जीएटीसी नियमों में संशोधन की प्रक्रिया को तेज करें। इस बैठक में भाग लेने वाले राज्यों ने बताया कि संशोधित नियमों का मसौदा तैयार करने और उन्हें मंजूरी देने का काम अब अंतिम चरण में है और उम्मीद है कि इन्हें जल्द ही अधिसूचित कर दिया जाएगा।

मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह भी आग्रह किया कि वे अपने जीएटीसी नियमों को जल्द से जल्द अधिसूचित करें और जीएटीसी व्यवस्था के तहत आने वाले सभी उपकरणों के दायरे का विस्तार करें। मंत्रालय ने यह भी बताया कि तकनीकी क्षमता को मजबूत करने और सुधारों के प्रभावी कार्यान्वयन में सहायता के लिए, विधिक माप अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भारतीय विधिक माप संस्थान (आईआईएलएम), रांची के माध्यम से आयोजित किए जाएंगे।

------------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर