कैट को होली पर 80 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कारोबार का अनुमान

 




नई दिल्ली, 22 फरवरी (हि.स)। रंगों का त्योहार होली देशभर के व्यापारियों के लिए बड़ी सौगात लेकर आ रहा है। कारोबारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के मुताबिक इस साल होली पर बाजारों में 80 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कारोबार की उम्मीद है। ये आंकड़ा पिछले साल के 60 हजार करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 25 प्रतिशत अधिक है।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने रविवार को जारी बयान में कहा कि होली के त्योहार पर इस साल देशभर में करीब 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक के व्यापार का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के करीब 60 हजार करोड़ रुपये के व्यापार की तुलना में लगभग 25 फीसदी अधिक है।

खंडेलवाल ने कहा कि इस बार होली पर भारतीय निर्मित हर्बल गुलाल, प्राकृतिक रंग, पिचकारियां, गुब्बारे, चंदन, पूजन सामग्री, परिधान तथा अन्य स्वदेशी उत्पादों की बिक्री बड़े पैमाने पर हो रही है, जबकि वर्ष 2021 से पहले देशभर के बाजारों में चीनी सामान का वर्चस्व हुआ करता था। होली से संबंधित वस्तुओं के अलावा मिठाइयों, ड्राई फ्रूट्स, गिफ्ट आइटम, फूल-फल, कपड़े, फर्निशिंग फैब्रिक, किराना, एफएमसीजी उत्पादों तथा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की भी बाजारों में भारी मांग देखी जा रही है।

खंडेलवाल ने कहा कि कैट के अनुमान के अनुसार केवल दिल्ली में ही लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का व्यापार होने की संभावना है। शहर के थोक और खुदरा बाजार रंग-बिरंगे गुलाल, आकर्षक पिचकारियों, गुजिया की मालाओं और ड्राई फ्रूट पैकों से सजे हुए हैं तथा दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ देखी जा रही है। मिठाई की दुकानों पर भी विशेष रूप से होली की पारंपरिक मिठाई ‘गुजिया’ की बिक्री में बड़ा उछाल आया है।

कैट महामंत्री ने बताया कि देशभर में होली मिलन समारोह बड़े स्तर पर आयोजित किए जा रहे हैं। दिल्ली में ही विभिन्न व्यापारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संगठनों द्वारा 3000 से अधिक होली मिलन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके चलते बैंक्वेट हॉल, फार्महाउस, होटल, रेस्टोरेंट और सार्वजनिक पार्क लगभग पूरी तरह बुक हो चुके हैं।

उन्होंने बताया कि दिल्ली में होलिका दहन 3 मार्च को होगा और रंगों की होली 4 मार्च को खेली जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत में त्योहार केवल सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव ही नहीं होते बल्कि वे आर्थिक गतिविधियों को भी गति देते हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर